अपने गोल्ड मेडल के साथ नीरज चोपड़ा
- फोटो : PTI
नीरज ओलंपिक में ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले देश के पहले और व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता था। नीरज ने पहले प्रयास में 87.03 मीटर भाला फेंका था और वह शुरू से ही पहले स्थान पर चल रहे थे। वहीं, दूसरे प्रयास में नीरज ने 87.58 मीटर भाला फेंका। यहीं उनका गोल्ड मेडल पक्का हो गया था। तीसरे प्रयास में वह 76.79 मीटर भाला ही फेंक पाए जबकि चौथे प्रयास में फाउल कर गए। उन्होंने छठे प्रयास में 84.24 मीटर भाला फेंका। मगर इससे पहले उनका गोल्ड मेडल पक्का हो गया था।
नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार थ्रो किया और 86.65 मीटर दूर भाला फेंका। इसके साथ ही वह फाइनल के लिए क्वालीफाई कर गए। फाइनल में सीधे प्रवेश करने के लिए 83.50 मीटर का थ्रो होना जरूरी है। नीरज का व्यक्तिगत बेस्ट 88.06 मीटर है। इस थ्रो के साथ उन्होंने 2018 एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता था।
दाईं कोहनी की चोट से उबरने के बाद ही नीरज ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। चोट की वजह से नीरज कई महीने खेल से दूर रहे, लेकिन चोट से उबरने के बाद दमदार वापसी की। दक्षिण अफ्रीका में आयोजित एथलेटिक्स सेंट्रल नार्थ ईस्ट मीट में 87.86 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। इससे पहले कोहनी में चोट की वजह से छह महीने उनका अभ्यास नहीं हो सका था।
कोरोना के कारण करीब एक साल से ज्यादा की अवधि से प्रतिस्पर्धाओं से चोपड़ा दूर रहे, लेकिन मार्च में वापसी करते ही उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 88.07 मीटर का थ्रो करके नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया था। नीरज ने अपने ही पिछले नेशनल रिकॉर्ड को एक सेंटीमीटर से तोड़ दिया। उस समय जब नीरज से इस बारे में पूछा गया तो नीरज चोपड़ा ने कहा कि कोरोना महामारी ने ट्रेनिंग की तैयारियों को काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने अपनी ट्रेनिंग को प्रभावित नहीं होने दिया। मेहनत से तैयारी की।
24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत में जन्मे नीरज किसान परिवार से आते हैं। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने वजन कम करने के लिए एथलेटिक्स ज्वाइन की थी। इसके बाद वह इसमें अच्छा करने लगे और कई टूर्नामेंट में जीत हासिल की। साल 2016 में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उनके प्रदर्शन में निरंतरता आई है। इससे पहले नीरज के पास तैयारी के लिए पूरे उपकरण नहीं होते थे, लेकिन भारतीय सेना में सूबेदार होने के बाद उनकी तैयारी और भी अच्छी हो गई। 2016 में ही विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 में उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद नीजर ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। लगातार एक के बाद एक रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करते गए। बता दें कि अपनी थ्रोइंग स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए नीरज ने जर्मनी के बायो मैकेनिक्स एक्सपर्ट क्लाउस बार्तोनित्ज से ट्रेनिंग ली है।
नीरज ने इससे पहले एशियन गेम्स 2018 जकार्ता स्वर्ण पदक, कॉमनवेल्थ गेम 2018 गोल्ड कोस्ट स्वर्ण पदक, एशियन चैंपियनशिप 2017 भुवनेश्वर स्वर्ण पदक, दक्षिण एशियाई खेल गुवाहाटी 2016 स्वर्ण पदक, वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2016 गोल्ड मेडल, एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2016 रजत पदक जीत चुके हैं।