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दूसरे विश्व युद्ध के बमों के फटने का खतरा, शहर करवाया खाली

Sun, 07 May 2017 04:05 PM IST
amarujala.com- Submitted By: मुकेश झा
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रविवार को जर्मनी के हेनोवर शहर से 50 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है ताकि दूसरे विश्वयुद्ध के बमों को निष्क्रिय किया जा सके। जर्मनी के इतिहास में इस तरह का ये दूसरा सबसे बड़ा अभियान है, जिससे शहर की जनसंख्या का दसवां हिस्सा प्रभावित होगा। खाली कराई जा रही इमारतों में सात अस्पताल, एक क्लानिक और एक टायर प्लांट शामिल हैं।
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अधिकारियों को उम्मीद हैं कि जिन लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है वो प्रक्रिया खत्म होने के बाद शाम तक वापस लौट पाएंगे। लोगों से इलाका खाली करवाने का काम स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे शुरू हो जाएगा। लोगों से जरूर सामान जैसे दवाईयां साथ ले जाने, गैस चूल्हे और बिजली के उपकरण बंद करने के लिए कहा गया है।

हो गया शहर बुरी तरह तबाह

स्थानीय खबरों के मुताबिक रेल सेवाओं में भी दोपहर तक देरी हो सकती है। निकाले गए लोगों के समय के सदुपयोग के लिए शहर में म्यूजिम टूर, बच्चों की फिल्मों और खेल के आयोजनों का इंतजाम किया गया है। जर्मनी की समचार एजेंसी डीपीए के अनुसार लोगों के लिए बड़ी मात्रा में सूप तैयार करवाया गया है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गठबंधन वाले विमानों ने हेनोवर में भारी बमबारी की थी जिसमें हजारों लोग मारे गए थे और शहर बुरी तरह तबाह हो गया था।
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वो रात सबसे खतरनाक थी

9 अक्टूबर 1943 की रात सबसे खतरनाक थी, 2लाख 61 बमों की वजह से 1245 लोग मारे गए थे और ढाई लाख लोग बेघर हो गए थे। पिछले साल क्रिसमस के दिन ऑसबर्ग में बमों को निष्क्रिय करने के लिए लोगों को निकालने का सबसे बड़ा अभियान चलाया गया था। एक इमारत के निर्माण कार्य के दौरान 3.8 टन बमों का पता चलने के बाद 54 हजार लोगों को निकाला गया था।
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