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थाईलैंड : बच्चों को महीनों तक गुफा में ही छोड़ने की थी योजना, एक चक्कर पूरा करने में लग रहे 11 घंटे

Mon, 09 Jul 2018 06:49 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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गुफा में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए गुफा के बाहर 13 मेडिकल टीम पूरी तरह से तैनात थी। हर टीम के पास अपना हेलीकॉप्टर था। इस तरह से 12 बच्चों और एक कोच के लिए अलग-अलग हेलीकॉप्टर की व्यवस्था थी। एक सूत्र ने बताया कि अस्पताल में पांच इमरजेंसी रेस्पॉन्स डॉक्टरों की टीम तैयार थी। इसके अतिरिक्त 30 डॉक्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया था। इसके बावजूद सभी लोग चिंतित थे। डॉक्टरों का दल इस बात से खुश था कि बच्चों को बाहर निकाला जा रहा है। वहीं टीम बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी काफी चिंतित थी।

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गुफा में जन्मदिन मना रहे थे छात्र
23 जून को गुफा में फंसने से पहले 12 छात्रों का समूह अपने एक साथी फीरापट उर्फ ‘नाइट’ का 16वां जन्मदिन मना रहा था। गुफा में फंसने के बाद नाइट ने अपने संदेश में कहा, ‘मम्मी-पापा और बहन मैं आपसे प्यार करता हूं। आप लोगों को मेरे बारे में चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है।’
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बच्चों को महीनों तक गुफा में ही छोड़ने की थी योजना
अधिकारियों ने बच्चों और कोच को गुफा से बाहर निकालने की कई योजनाएं बनाई थीं। इनमें एक योजना खराब मौसम के कारण गुफा में फंसे बच्चों को महीनों तक वहीं छोड़ने की थी। अधिकारी मानसून के पूरी तरह से खत्म होने और बाढ़ के थमने के बाद अभियान शुरू करने की सोच रहे थे। लेकिन ऑक्सीजन स्तर में कमी और जलस्तर के बढ़ने की आशंका के मद्देनजर इस योजना को खारिज कर दिया गया।

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गुफा का एक चक्कर पूरा करने में लग रहे 11 घंटे
विशेषज्ञ गोताखोरों को गुफा का एक चक्कर पूरा करने में करीब 11 घंटे का वक्त लग रहा है। इससे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में ज्यादा समय लग रहा है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि गुफा में फंसे अन्य बच्चों और कोच भी जल्द बाहर निकाल लिया जाएगा। मिशन में लगे एक आर्मी कमांडर ने रेस्क्यू ऑपरेशन में एक से दो दिन का वक्त लगने की भी बात कही है।

मिली अंतरराष्ट्रीय मदद
फंसे लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी मिल रही है। अभियान में थाईलैंड 40 गोताखोर के अलावा 50 विदेशी गोताखोर भी लगाए गए हैं। साथ ही आठ देशों के विशेषज्ञ भी जुटे हुए हैं। रेस्क्यू दल में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप एवं एशिया के कई देशों के गोताखोर भी शामिल हैं। 

‘टी जंक्शन’ पर सबसे अधिक खतरा
फंसे हुए बच्चों को निकालने में गुफा के बाहर निकलने से ठीक पहले ‘टी जंक्शन’ पर सबसे अधिक खतरा था। बचाव अभियान के प्रमुख नारोंगसाक ओसोटानाकोन ने 2 जुलाई को कहा था कि गोताखोरी में सबसे अधिक संकट टी- जंक्शन के बायीं तरफ है। गुफा से बाहर निकलने का रास्ता काफी उतार-चढ़ाव वाला है। इस दौरान बाहर निकलने के लिए थोड़ा सा मुड़ना पड़ता है और यह जगह काफी कम है।
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