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'तालिबान की फूट खत्म, मुल्ला मंसूर नए नेता'

Thu, 05 May 2016 09:18 AM IST
माजिद नुसरत/बीबीसी मॉनिटरिंग
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अफगानिस्तान के तालिबान से अनाधिकारिक रूप से जुड़ी एक वेबसाइट ने दावा किया है कि इस चरमपंथी समूह के अंदरूनी मतभेद खत्म हो गए हैं और लगभग सभी कमांड़रों ने मुल्ला अख्तर मंसूर को अपना नया नेता स्वीकार कर लिया है।इस वेबसाइट पर जारी बयान तालिबान से अलग हुए एक धड़े और पूर्वी अफगानिस्तान में उभरे एक प्रतिद्वंद्वी इस्लामिक स्टेट ग्रुप के लिए झटका माना जा रहा है। पिछले साल जुलाई में तालिबान के नेतृत्व में तब फूट पड़ गई थी जब पताचला कि समूह के संस्थापक मुल्ला उमर सालों पहले मर गए हैं।इस्लामिक स्टेट के उभार से तालिबान की समस्याएं और बढ़ गईं क्योंकि कई छितरे हुए इस्लामिक गुटों ने अप्रभावी तालिबान के बीच भर्ती शुरू कर दी थी।
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हालिया घटनाओं से गुट के अंदर उल्लेखनीय मतभेद समाप्त हो सकते हैं, जिससे चरमपंथी समूह के नए नेता मजबूत होंगे- जंग में भी और शांति काल में भी।पूर्वी क्षेत्र में अमेरिका-अफगानिस्तान के इस्लामिक स्टेट पर हवाई हमलों से तालिबान को उल्लेखनीय रूप से फायदा हुआ है और इससे मंसूर को अंदरूनी विरोध को दबाने का मौका मिल गया।अमेरिकी-अफगानी सेनाओं के हवाई हमलों ने इस्लामिक स्टेट की बढ़त को पीछे धकेला तो मंसूर ने दक्षिण में मुल्ला मोहम्मद रसूल के नेतृत्व में अलग हो रहे मुख्य गुट को कुचल दिया।कहा जा रहा था कि मार्च में पश्चिमी अफगानिस्तान के अपने प्रमुख गढ़ शिंदांद पर हमले के बाद वहां से भागे रसूल को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन तालिबान मीड़िया ने उनकी गिरफ्तारी, समूह के पाकिस्तान के हथियार की छवि और पाकिस्तान की विद्रोही नेताओं और धड़ों को अपने हिसाब से इस्तेमाल करने की क्षमता की खबरों को दबाकर रखा।

मंसूर को तालिबान पर नजर रखने वाले अक्सर पाकिस्तान की पसंद के रूप में देखते हैं। 12 अप्रैल को वेबसाइट ने लिखा कि 'अलग हुए धड़े के नजदीकी लोग भी पाकिस्तान में मुल्ला रसूल की गिरफ्तारी से इनकार कर रहे हैं।'इसने आरोप लगाया कि मुल्ला रसूल के सहायक और प्रवक्ता मुल्ला मनान नियाजी 'काबुल में अफगान गुप्तचर सेवा एनड़ीएस के गेस्ट हाउस में रहते हैं और नियमित रूप से सरकारी अधिकारियों से मिलते हैं।' इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि शिंदांद की जंग में 'सरकार के पक्ष में जाने के बाद' घायल हो गए रसूल के मुख्य कमांड़र मुल्ला नन्ग्यालाइ का काबुल में इलाज चल रहा है।
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हो सकता है कि रसूल की मौत हो गई?

वेबसाइट में भी आशंका जताई गई कि हो सकता है कि रसूल की मौत हो गई हो। 26 अप्रैल को वेबसाइट में लिखा गया, 'मुल्ला रसूल के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि मीड़िया से उनकी अचानक अनुपस्थिति से इन अफवाहों को बल मिल रहा है कि वह शिंदांद में तालिबान और स्थानीय चरमपंथियों के संघर्ष में मारे गए हैं।' 'अगर यह सही है तो उनके सबसे नजदीकी सहयोगी मुल्ला मनान नियाजी ही तालिबान का विरोध करने वाले अकेले व्यक्ति बच जाते हैं।

'वेबसाइट के अनुसार लगभग सभी तालिबान नेताओँ ने एकता की खातिर अपने मतभेद दरकिनार कर दिए हैं। अन्य मीड़िया रिपोर्टों में कहा गया है कि ज्यादातर अप्रभावी तालिबान नेताओं और शख्सियतों को रिश्वत या दबाव देकर मना लिया गया है। 29 मार्च को वेबसाइट ने तालिबान की 'एकता कायम होने' पर काबुल के लेखक और राजनीतिक टिप्पणीकार नजर मोहम्मद मुतमइन का एक लंबा लेख छापा। इसमें कहा गया है कि मुख्य विद्रोही गुट करीब-करीब खत्म हो गए हैं और अन्य कमांड़रों और नेताओं ने मंसूर के साथ समझौता कर लिया है।मुतमइन ने लिखा, 'दिवंगत मुल्ला उमर के बेटे और भाई भी शुरुआत में नाखुश थे लेकिन अंततः वह भी मुल्ला मोहम्मद अख्तर मंसूर के साथ आ गए।'उन्होंने यह भी लिखा है कि कंधार में तालिबान की पूर्व-गवर्नर मुल्ला हसन रहमानी और पूर्व मंत्रियों मुल्ला अब्दुल रजाक और मुल्ला अब्दुल जलील ने 'अपना खुला विरोध छोड़ दिया है'।

30 मार्च को वेबसाइट ने तालिबान के सैन्य आयोग के पूर्व प्रमुख और दक्षिण के प्रभावशाली कमांड़र मुल्ला अब्दुल कयूम जाकेर का निष्ठा जताने वाला पत्र प्रकाशित किया। उन्हें 2014 में मुल्ला मंसूर ने उनके पद से हटा दिया था और तब से मंसूर-विरोधी लोग उन्हें घेरे हुए थे।हालांकि वेबसाइट स्वतंत्र होने का दावा करती है लेकिन इसके फेसबुक और ट्विटर अकाउंट अनाधिकारिक तालिबानी मीड़िया आउटलेट की तरह काम करते हैं। वह तालिबान के नजरिये को बढ़ावा देते हैं और इस तरह की प्रचार सामग्री प्रसारित करते हैं जिसे आमतौर पर यह चरमपंथी समूह नहीं फैला सकता।वेबसाइट पर नियमित रूप से लिखने वाले और काबुल में टीवी बहसों में हिस्सा लेने वाले नजर मोहम्मद मुतमइन पिछले कुछ महीने में तालिबान के राजनीतिक नजरिए को रखने वाले प्रमुख शख्स के रूप में उभरे हैं।कहा जाता है कि वह मुल्ला उमर के प्रवक्ता रहे और अब मंसूर के वरिष्ठ सहयोगी के रूप में काम कर रहे अब्दुल हाइ मुतमइन के भाई हैं।
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