श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघ के बीच बृहस्पतिवार को कैबिनेट गठन के वक्त जबर्दस्त टकराव देखने को मिला। सिरीसेना ने 30 सदस्यीय कैबिनेट को मंजूरी देते वक्त विक्रमसिंघे द्वारा मनोनीत सदस्यों की अनदेखी की। इतना ही नहीं सिरीसेना ने देश के सुरक्षा बलों और पुलिस पर अपना नियंत्रण रखते हुए ये विभाग अपने पास ही रखे। इस दौरान साफ संकेत मिले कि दोनों नेताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं।
सिरीसेना ने विक्रमसिंघे की ओर से कैबिनेट के लिए उन मनोनीत सदस्यों को नजरअंदाज किया, जो उनकी श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) से अलग हो गए थे। बता दें कि एसएलएफपी के तीन वरिष्ठ नेता पार्टी से अलग होकर विक्रमसिंघ की यूनाईटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ हो गए थे।
कानून व्यवस्था भी संभालेंगे
सिरीसेना ने कानून व्यवस्था मंत्रालय भी अपने पास रखा है, जिसका यूएनपी सदस्यों ने विरोध किया। उनका दावा है कि राष्ट्रपति को पर्यावरण के अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय का प्रभार दिए जाने की ही व्यवस्था है। वहीं माना जा रहा है कि सिरीसेना ने पुलिस महकमा इसलिए अपने पास रखा है क्योंकि राष्ट्रपति की कथित हत्या की साजिश के मामले की जांच पुलिस ही कर रही है, जिसके बाद देश में राजनैतिक संकट पैदा हुआ था। इसके अलावा उन्होंने रक्षा, महावेली डेवलपमेंट और पर्यावरण मंत्रालय भी अपने पास रखा है। विक्रमसिंघे ने राष्ट्रीय नीति, आर्थिक मामले, पुनर्वास, उत्तर प्रांत विकास, व्यवसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और युवा मामले अपने पास रखे हैं।
विक्रमसिंघे के साथ काम जारी रखने को आशान्वित : अमेरिका
दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमेरिका के उप सहायक विदेश मंत्री डेविड रैंज ने कहा, हम श्रीलंका की अदालतों में दिखी लोकतांत्रिक, संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर खुश हैं। हम समान हित के द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने को प्रधानमंत्री व उनके मंत्रिमंडल और राष्ट्रपति सिरीसेना के साथ भी कार्य जारी रखने को लेकर आशान्वित हैं।