बिहार से सटे नेपाल के सीमावर्ती सखड़ा छिन्नमस्ता गांव में मंगलवार को भारत की ओर से नेपाल को नाकेबंदी करने के संकेत देने पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारेबाजी हुई।
भारत सरकार की ओर से सोमवार रात जारी बयान के वाद मोदी के पक्ष में मधेसी जनता ने नारेबाजी की।
मधेसी मोर्चा के घटक दल सद्भावना पार्टी के महासचिव मनीष सुमन ने अमर उजाला से कहा की भारत की ओर से मधेसियों के समर्थन में जारी बयान के वाद मधेसीयों में पहले से रहा भारत के प्रति सद्भाव और बढ़ गया है।
कोइराला की अपील ठुकराई
वहीं नेपाली संविधान के खिलाफ आंदोलन कर रहे मधेसी और थारू नेताओं ने प्रधानमंत्री सुशील कोइराला की सुलह की अपील ठुकरा दी है। कोइराला ने मंगलवार को आंदोलनरत मधेसी दल के नेता महंत ठाकुर से मिलकर समस्या का हल निकालने का आश्वास दिया, लेकिन इस आश्वासन को सिरे से खारिज करते हुए पहले संविधान संशोधन करने की शर्त रखी गई।
संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा के घटक दल तराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष महंत ठाकुर ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री ने बस पुरानी बातें दोहराई, समस्या का हल निकालने को लेकर ठोस बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पीएम उनके साथ जव वार्ता कर रहे थे ठीक उसी वक्त कलैजा जिले में पुलिस घर में घुसकर मधेसियों के साथ ज्यादती कर रही थी।
प्रधानमंत्री कोइराला ने तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी के केंद्रीय कार्यालय पहुंचकर मधेसी मोर्चा के मुख्य नेता रहे ठाकुर से बातचीत की थी। हालांकि ठाकुर ने शुरुआत में वार्ता को लेकर अनिच्छा जाहिर की थी, लेकिन कोइराला ने अपनी पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए ठाकुर से मिलने की अपील की, जिसके बाद दोनों में मुलाकात हुई।
ठाकुर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी यह गोरखा नहीं नेपाल सरकार है, गोरखाओं ने लूटपाट कर मधेस क्षेत्र पर शासन किया था। आप (पहाड़ी मूल) अब भी खुद को शासक और हमलोग को प्रजा के रूप में देख रहे हैं जो अव संभव नही है ।’