अब मूत्र (यूरिन) से बिजली तैयार की जा सकेगी। वैज्ञानिकों ने ऐसी मिनिअचर माइक्रोबियल फ्यूल सेल विकसित करने में अहम कामयाबी हासिल की है, जो मूत्र को बिजली में तब्दील करने में सक्षम है। यह सफलता जैव ऊर्जा (बायोएनर्जी) उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
खासकर विकासशील देशों में इस तकनीकी से बड़े पैमाने पर बिजली की कमी को पूरा किया जा सकता है। इससे भी अहम बात यह है कि यह फ्यूल सेल बेहद छोटा और सस्ता होने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा बिजली उत्पादन करने में सक्षम है।
यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ, क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और ब्रिस्टल रोबोटिक्स लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने बताया कि माइक्रोबियल फ्यूल कोशिकाएं मूत्र जैसी बेकार चीजों से नवीनीकरण जैव ऊर्जा का उत्पादन करने में सक्षम है।
उनका कहना है कि दुनिया भर में रोजाना काफी मात्रा में मूत्र एकत्रित करके बिजली का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे जैव ऊर्जा के उत्पादन में क्रांति लाई जा सकती है। इलेक्ट्रोकिमिका एक्टा जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक माइक्रोबियल फ्यूल सेल एक उपकरण है, जो खास तरह के बैक्टीरिया की मदद से प्राकृतिक तरीके से जैविक पदार्थ को बिजली में तब्दील कर देता है।