लोकतंत्र समर्थक आंग सान सू की जीत भारत-म्यांमार संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय
मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार में चीन के बढ़ते असर को
ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी लुक ईस्ट नीति पर
अमल करते हुए उसके साथ आपसी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल
करनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों के आपसी रिश्ते पूर्वोत्तर भारत
के लिए बेहद अहम हैं।
पूर्वोत्तर भारत की लगभग 1640 किमी लंबी सीमा
म्यांमार से लगी है। असम, नगालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा के तमाम उग्रवादी
संगठनों के लिए म्यांमार दशकों से एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है। यही वजह है
कि सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद पूर्वोत्तर में उग्रवाद पर अंकुश नहीं लगा
सकी है। बीते कुछ वर्षों से म्यांमार से भाग कर आने वाले रोहिंग्या
मुसलमान भी विभिन्न राज्यों में सांप्रदायिक तनाव का कारण बन रहे हैं।
मणिपुर के कुछ इलाकों में तो उनके कारण जातीय तनाव बना ही रहता है।