श्रीलंका में जारी राजनीतिक संकट के बीच अमेरिका और राष्ट्रमंडल ने अपील की है कि द्वीपीय देश में संसद का सत्र जल्द से जल्द बुलाया जाए। ऐसा इसलिए ताकि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को यहां राजनीतिक संकट सुलझाने की दिशा में अपनी बात रखने का मौका मिल सके। राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना पर संसद सत्र बुलाने के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत अलाइना बी तेपलित्ज ने मंगलवार को स्पीकर कारू जयसूर्या से मुलाकात की। तेपलित्ज ने ट्वीट कर कहा, कारू जयसूर्या से मुलाकात कर संसद फिर से बुलाने के महत्व पर चर्चा की गई ताकि यह राजनीतिक संकट खत्म किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि इन लोकतांत्रिक संस्थानों को श्रीलंका की जनता की सेवा करनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को उनकी बात कहने दी जाए।
घटनाक्रम पर बहुत करीब से नजर: भारत
वहीं भारत का कहना है कि वह श्रीलंका के घटनाक्रम पर ‘बहुत करीब’ से नजर रख रहा है और उम्मीद करता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सांविधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने इस राजनीतिक संकट पर चिंता जताई है और राष्ट्रपति से संसदीय प्रक्रिया को बदलने और संसद में जल्द से जल्द मतदान कराने को कहा है।
श्रीलंका संकट : राष्ट्रपति सिरीसेना को झटका, सरकार से एक उपमंत्री का इस्तीफा
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना को मंगलवार को तब तगड़ा झटका लगा जब यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस (यूपीएफए) सरकार के एक उपमंत्री ने इस्तीफा दे दिया और बर्खास्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे का समर्थन किया। सिरीसेना/राजपक्षे के 96 सांसदों की सूची में शामिल रहे सांसद मनुशा नानायक्कारा ने राष्ट्रपति सिरीसेना को पत्र में कहा कि उनकी राय में विक्रमसिंघे अभी भी वैध प्रधानमंत्री हैं, जैसा कि स्पीकर कारू जयसूर्या का कहना है। उन्होंने सिरीसेना का पक्ष छोड़ने के लिए और विक्रमसिंघे के खेमे में शामिल होने के लिए श्रम और विदेश रोजगार उपमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
जबकि उन्होंने 1 नवंबर को ही उपमंत्री के रूप में शपथ ली थी। नानायक्कारा ने एक वीडियो मैसेज में कहा, वह मनमाने तरीके से राजनीतिक नियुक्तियों को स्वीकार नहीं करते और लोकतंत्र की रक्षा और समर्थन के लिए विक्रमसिंघे का समर्थन करते रहेंगे। नानायक्कारा ने यह घोषणा ऐसे समय की जब कुछ घंटे पहले ही सिरीसेना ने सार्वजनिक रूप से कहा कि लोगों को इस बात पर शक नहीं करना चाहिए कि हमें 225 में से 113 सदस्यों का बहुमत प्राप्त है।