तालिबान ने पाकिस्तान में पिछले दिनों पेशावर के चर्च पर हुए हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया है, लेकिन इसे शरियत के मुताबिक़ बताया है।
इस हमले में लगभग 80 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे।
तालिबान के प्रवक्ता शाहिदुल्लाह शाहिद ने बीबीसी उर्दू के साथ बातचीत में कहा, “ये हमला शरियत के मुताबिक है, लेकिन ये हमने नहीं किया है। हमने पूरी छानबीन की और उसके बाद मीडिया को बताया कि इसमें हमारा कोई हाथ नहीं है।”
शाहिदुल्लाह शाहिद के अनुसार वो इस हमले की निंदा नहीं करते हैं।
हालांकि पेशावर में ही क़िस्साखवानी बाज़ार में हुए हमले की तालिबान प्रवक्ता ने निंदा की और इसके लिए पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसियों को ज़िम्मेदार बताया।
उन्होंने कहा, “ये बहुत ही घातक हमला था। ये हमने किया नहीं और इसलिए इसकी ज़िम्मेदारी नहीं कबूली। हमें ये ख़ुफिया एजेंसियों की कार्रवाई लगती है।”
हालांकि धार्मिक मामलों के जानकार पेशावर चर्च पर हमले को शरियत के मुताबिक़ सही बताने के तालिबान के दावे पर सवाल उठाते हैं।
शरियत विद्वान राग़िब नेमी कहते हैं, “एक मुस्लिम देश में रहने वाले चाहे वो मुसलमान हों या ग़ैरमुस्लिम अल्पसंख्यक हों, बिना किसी वजह उनकी जान नहीं ली जानी चाहिए।”
14 दिन में डेढ़ सौ मौतें
बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी वाले पाकिस्तान में ईसाइयों की तादाद कुल आबादी का 1.6 फ़ीसदी है। पेशावर में चर्च पर हमले के बाद देश भर में ईसाइयों ने प्रदर्शन कर अपने समुदाय की सुरक्षा की मांग की है।
राग़िब नेमी कहते हैं, “किसी इस्लामी देश के अंदर किसी ग़ैर मुस्लिम का क़त्ल, गोली मारना या उन्हें धमाकों से उड़ाने की इस्लाम बिल्कुल इजाज़त नहीं देता।”
पाकिस्तान के ख़ैबर पखतूनख्वाह प्रांत की राजधानी पेशावर में 22 सितंबर से अब तक हुए तीन बड़े बम हमलों में लगभग 150 लोग मारे गए हैं।
पाकिस्तान में ये हिंसा ऐसे समय में हो रही है जब चरमपंथियों से निपटने के लिए सरकार उनके साथ बातचीत के लिए कोशिश कर रही है।
हालांकि तालिबान की तरफ से ड्रोन हमले बंद कराने की शर्त रखने के बाद इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी तरफ़ ख़ैबर पखतूनख्वाह में सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान का कहना है कि तालिबान को पेशावर में दफ्तर खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।
लेकिन इस बारे में तालिबान के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, “दफ्तर खोलने का हमारा अभी हमारा कोई इरादा नहीं है। हम कराची, इस्लामाबाद और पेशावर और दूसरे शहरों में मौजूद हैं। हमें दफ्तर की कोई ज़रूरत नहीं है।”