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यूक्रेन में रूसी सेना भेजने की जरूरत नहीं: पुतिन

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रूस से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन में रूसी सेना भेजने की अभी कोई ज़रूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने भविष्य में सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया।
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उन्होंने एक पत्रकार वार्ता में कहा, "रूस के पास अपने नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए 'कोई भी क़दम' उठाने का अधिकार है।" क्राईमिया में रूस और यूक्रेन के सैन्य बलों के बीच तनावपूर्ण गतिरोध बना हुआ है।

पुतिन ने यूक्रेन के अपदस्थ राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को पद से हटाए जाने को 'असंवैधानिक तख्तापलट और सत्ता पर हथियार के दम पर किया गया कब्जा' बताया।

उन्होंने कहा, 'चरमपंथियों' ने देश को 'अराजक' हालात में धकेल दिया है।

पुतिन ने कहा कि यानुकोविच ने विपक्ष की सभी मांगें मान ली थीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यानुकोविच अब भी यूक्रेन के वैध राष्ट्रपति हैं।

राष्ट्रपति को हटाने के तीन तरीके
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को हटाने के केवल तीन तरीके हैं: मौत, निजी इस्तीफ़ा और महाभियोग। पुतिन ने कहा, "पूर्वी यूक्रेन के रूसी भाषी लोग रूस से मदद मांगते हैं तो रूस उनकी मांग पर कार्रवाई करेगा।"
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उन्होंने, "अगर पूर्वी यूक्रेन में अराजकता बनी रहती है तो रूस के पास कोई भी क़दम उठाने का अधिकार है।"

पुतिन ने कहा कि क्राईमिया में यूक्रेन के सैन्य ठिकानों को रूसी सेना ने नहीं बल्कि रूस-समर्थक हथियारधारियों और आम जनता ने घेरा हुआ है।

यूक्रेन ने कहा है कि रूस ने पिछले कुछ दिनों में क्राईमिया में हज़ारों सैनिकों को तैनात किया है। सबसे ज़्यादा तनाव क्राईमिया के तटीय शहर सेवेस्तपोल शहर में है। इस शहर में रूस के काला सागर बेड़े का ठिकाना है।
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अपदस्थ किए जाने के बाद यूक्रेन छोड़ने के बाद यानुकोविच रूस चले गए हैं। पुतिन ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनका कोई राजनीतिक भविष्य है।"

पुतिन ने कहा कि रूस ने 'मानवीय आधार' पर उनकी मदद की है वरना 'उन्हें मार दिया जाता।'
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