भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय को वापस बुलाने के नेपाल सरकार के निर्णय को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। नेपाल की कांग्रेस पार्टी ओली सरकार के इस फैसले से बेहद नाराज है और उसने सरकार से उपाध्याय को वापस बुलाने का कारण स्पष्ट करने को कहा है।
सत्ताधारी एमाले के नेता और उपप्रधानमंत्री भीम रावल ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रहित के विपरीत काम करने की वजह से राजदूत को वापस बुलाया गया है। उन्होंने उपाध्याय पर सत्ता परिवर्तन के खेल में शामिल होने का भी आरोप लगाया। संसदीय बैठक में बोलते हुए कांग्रेस के सांसद प्रकाश शरण ने कहा कि सरकार को राजदूत को वापस बुलाने का कारण बताना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उपाध्याय पर आरोप लगाकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के नेतृत्व वाली सरकार प्रतिशोध की राजनीति कर रही है। कांग्रेस के केंद्रीय स्तर के नेता रहे उपाध्याय को तत्कालीन सुशील कोइराला की नेतृत्व वाली सरकार ने भारत में नेपाल का राजदूत नियुक्त किया था। कांग्रेस की पहल पर ओली सरकार को गिराने का प्रयास असफल होने के दिन ही नेपाल सरकार ने राजदूत को वापस बुला लिया था।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों की मानें, तो उपाध्याय को वापस बुलाने के पीछे सरकार को सूचित किए बिना नेपाल में भारतीय राजदूत रंजीत रे के साथ कंचनपुर
में कार्यक्रम आयोजित करने, विदेश मंत्रालय की अनुमति के बिना दूतावास छोड़कर जाने और सरकार गिराने के खेल में शामिल होने जैसे गंभीर कारण शामिल हैं।