संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसके पास इस तरह की सूचनाएं आई हैं कि इराक में "क्रूरता के उस तरह के कृत्य अंजाम दिए गए हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।"
संयुक्त राष्ट्र मानवधिकार संस्था की उप प्रमुख फ्लाव्यू पानसेरी ने कहा है कि ऐसा समझा जाता है कि इस्लामिक स्टेट ने नागरिकों पर जानबूझकर सुनियोजित तरीक़े से हमले किए हैं।
इनमें निशाना बनाकर हत्या, जबरन धर्म परिवर्तन, दासता, यौन हिंसा और सारे समुदाय को बंधक बनाना शामिल है।
संस्था आईएसआईएस के मानवाधिकार हनन के मामलों की जांच के लिए एक आपात समिति इराक़ भेजने के लिए तैयार हो गई है।
इराक़ के मानवाधिकार मामलों के मंत्री का कहना है कि उनका देश चरमपंथ के दानव का सामना कर रहा है और उससे पूरे क्षेत्र को खतरा है।
पिछले कुछ महीनों में सुन्नी चरमपंथी समूह आईएस और उसके समर्थक समूहों ने उत्तर और पश्चिम इराक़ के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है जिसके बाद से वहां उथल पथल और तेज़ हो गई है।