ईरान ने इस्राइल को केंद्रित कर बुधवार को दो बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। इन मिसाइलों पर हिब्रू भाषा में लिखा था, ‘इस्राइल को मिटना ही होगा’। ईरान की ओर से यह उत्तेजक कार्रवाई ऐसे समय की गई है जब अमेरिका के उप राष्ट्रपति जो बाइडेन इस्राइल में ही हैं। वैसे ईरान की मिसाइलों पर पहले भी ऐसी भड़काऊ पंक्तियां लिखी जा चुकी हैं। लेकिन इस बार यह परीक्षण विश्व शक्तियों के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते के लागू होने के कुछ समय बाद ही हुआ है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के एयरोस्पेस डिवीजन के प्रमुख आमिर अली हजीजादे ने कहा कि इस्राइल का मुकाबला करने के लिए मिसाइलों की मारक क्षमता 2000 किमी तक बढ़ाई गई है। उन्होंने साफ कहा कि इन परीक्षणों का मकसद इस्राइल को यह दिखाना था कि ईरान उस पर हमला करने में सक्षम है। इस्राइल इस्लामी राष्ट्रों से घिरा है और वह युद्ध में ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।
ईरान की फौज ने अमेरिकी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए रॉकेट और मिसाइलों का परीक्षण किया है। देश के सरकारी टेलीविजन पर भूमिगत मिसाइल बेस की भी तस्वीरें दिखाई गईं। इस्राइल की ओर से फौरन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस बीच, यरूशलम में अमेरिकी उप राष्ट्रपति बाइडेन ने इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की, जिन्होंने एटमी डील का कड़ा विरोध किया था। बाइडेन ने मिसाइल परीक्षण की चर्चा किए बगैर ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘परमाणु हथियारों से लैस ईरान इस्राइल ही नहीं, समूचे क्षेत्र और अमेरिका के लिए खतरा है। कुछ लोगों को संदेह है इसलिए मैं इस बात को दोहराना चाहूंगा कि अगर ईरान ने समझौते का उल्लंघन किया तो हम कार्रवाई करेंगे।’