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ग्रीस के बैंकों पर ताले, ताकि लोग न निकालें पैसे

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ग्रीस के प्रधानमन्त्री एलिक्सिस त्सिप्रास ने सोमवार को सभी बैंकों को बंद रखने को कहा है। इसके साथ ही एटीमएम मशीनों से पैसा निकालने निकालने पर भी पाबंदियां लगा दी गईं हैं। सरकार का कहना है कि हफ्ते भर तक बैंकों में कामकाज नहीं होगा।
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इस दौरान खाता धारकों को दिन में 60 यूरो से ज़्यादा निकालने की अनुमति नहीं होगी। लोग बिना पूर्व अनुमति के अपने पैसे को देश के बाहर भी नहीं भेज सकेंगे। उधर यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने ग्रीस की बैंकिंग प्रणाली के लिए और आपात सहायता नहीं देने का फ़ैसला किया है।

ग्रीस और यूरोज़ोन के बीच बातचीत के विफल हो जाने के बाद ईसीबी ने यह फैसला लिया था। बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता ऐन्ड्रू वॉकर के अनुसार ग्रीस के प्रधानमन्त्री एलिक्सिस त्सिप्रास कम ही रास्ते बचे थे। ईसीबी की घोषणा ने ग्रीस के बैंकों के ऊपर दबाव और बढ़ा दिया है। ग्रीस के बैंक जो पहले से ही केंद्रीय बैंक के ऊपर निर्भर थे उनके दरवाज़ों पर पैसा निकालने वाले चिंतित ग्राहकों की कतारें लग गईं हैं।
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क्या डर है लोगों को

ग्रीस के लोगों को डर है कि उन्हें उनके ही पैसे निकालने से रोक दिया जाएगा या फिर उनके उनकी यूरो मुद्रा को ग्रीक की करंसी ड्राक्मा में तब्दील दिया जाएगा जिसकी की कोई कीमत नहीं होगी।

ईसीबी इतना सख़्त कदम उठाने के लिए इसलिए मजबूर हुई क्योंकि ग्रीस और यूरोज़ोन के दूसरे देशों बातचीत शुक्रवार को विफल हो गई थी। ग्रीस को मंगलवार तक एक बड़ा भुगतान करना है और भुगतान की अवधि समाप्त होने पर ग्रीस दिवालिया होने के करीब है।

एलिक्सिस त्सिप्रास दरअसल यूरोप के बाकी देशों से ग्रीस में जनमत संग्रह के परिणाम आने तक रुकने के लिए कह रहा है जिसके लिए यूरोप के देश राज़ी नहीं हैं।

त्सिप्रास ने यूरोज़ोन के अन्य देशों की कड़ी निंदा की है। देश के प्रधानमंत्री त्सिप्रास ने टीवी पर भाषण में जनता को शांति बनाए रखने को कहा और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके पैसे, वेतन और पेंशन सुरक्षित हैं।
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