इराक में गहराते संकट ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चुनौती पेश की है। बीबीसी ने कोशिश की इस संकट से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने की कुछ विशेषज्ञों के साथ:
डॉक्टर काओ चुकुई, अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान, चीन की केंद्रीय समिति का पार्टी स्कूल
मौजूदा संकट की दो वजह हैं। पहली, सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सेनाएं मज़बूत हुई हैं। जो संघर्ष एक सरकार और उदारवादी विपक्ष के बीच था वो संघर्ष अब त्रिकोणीय हो गया जिसमें सरकार, विपक्ष और आईएसआईएस जैसे चरमपंथी संगठन शामिल हैं।
सीरियाई सरकार की स्थिति मज़बूत होने के कारण उसने आईएसआईएस जैसे संगठनों के लिए हालात मुश्किल कर दिए और वे उत्तरी इराक़ की तरफ़ जाने को मजबूर हुए हैं।
दूसरी वजह, इराक़ी प्रधानमंत्री नूर अल मलिकी के नेतृत्व में शियाओं ने राजनीतिक रूप से सुन्नियों का शोषण किया है जिससे उनके बीच संकट और गहरा गया। इससे आईएसआईएस की गतिविधियों को उपजाऊ जमीन मिली।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में इराक़ का दौरा किया और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। मलिकी चुनाव के जरिए सत्ता में आए हैं, इसीलिए चीनी सरकार को उम्मीद है कि वो स्थिरता क़ायम करने के लिए क़दम उठा सकते हैं। चीन के हस्तक्षेप की अपीलें हो रही हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि चीन ऐसा कदम उठाएगा।
चीन की तीन सबसे बड़ी कंपनियों ने इराक़ में निवेश किया है। वो स्थिति पर नज़दीकी से नज़र रखे हुए हैं। अभी उन्होंने अपने कर्मचारियों को वहां से नहीं हटाया है।
निश्चित तौर पर चीनी सरकार वहां की स्थिति को लेकर चिंतित है और इसका असर पहले ही तेल के अस्थिर बाज़ार पर पड़ने लगा है। इराक़ में स्थिरता बहाल करना न सिर्फ चीन बल्कि सभी इराक़ियों के भी हित में है।