फारस की खाड़ी में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौता मुमकिन है, लेकिन इसके लिए प्रतिबंध जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि ईरान हमसे परमाणु करार करना चाहता है और मुझे लगता है कि ऐसा संभव है।
जापानी प्रधानमंत्री आबे शिंजो के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता संभव है, लेकिन इसके लिए कुछ आर्थिक और दूसरे प्रतिबंध भी जरूरी हैं।
जापान दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को ईरान के प्रति नरम रुख दिखाते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि स्थितियां भयावह बनें। उनका विश्वास है कि ईरान यदि बातचीत करना चाहता है तो अमेरिका भी इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है।
ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता है। हम बस यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि कोई परमाणु हथियार न बने। बताते चलें कि पिछले साल अक्तूबर में ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने आरोप लगाया था कि अमेरिका तेहरान में सत्ता परिवर्तन चाहता है। अमेरिका की मौजूदा सरकार पिछले चार दशक में सबसे अधिक शत्रुतापूर्ण रवैया अपना रही है।
धमकियां देना बंद करें अमेरिकी राष्ट्रपति : ईरान
ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जारिफ ने कहा, ‘कार्रवाई सिर्फ शब्द नहीं वह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इरादों को स्पष्ट कर सकता है। ट्रंप बार बार इस तरह की धमकियां न दें और तेहरान को परमाणु हथियारों की आवश्यकता नहीं है।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनई ने बहुत पहले कहा था कि हम एक फतवा जारी करके परमाणु हथियारों की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन पर प्रतिबंध लगा रहे हैं।’ 2018 के बाद अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को आर्थिक आतंकवाद बताते हुए जारिफ ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध ईरानी लोगों को परेशान कर रहे हैं जिससे क्षेत्र में तनाव पैदा हो रहा है। जारिफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल का हवाला देते हुए कहा, ‘बयान नहीं, बल्कि उठाए जाने वाले कदम से पता चलेगा कि ट्रंप का यह इरादा है या नहीं।’