माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए ज्यादा परमिट जारी करना पर्वतारोहियों की मौत का बड़ा कारण है। अनुभवी पर्वतारोहियों के मुताबिक, सरकार ने परमिट को सीमित नहीं करने के कारण अप्रशिक्षित पर्वतारोही की संख्या में इजाफा हुआ, जिससे लोगों को जान गंवानी पड़ी।
हालांकि पर्वतारोहियों का कहना है कि यह मौसम एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिहाज से अनुकूल है, लेकिन भीड़ बढ़ने से थोड़ी सी जगह में 20 लोगों को खड़ा रहना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 381 लोगों को परमिट जारी किए गए। जो अब तक का रिकॉर्ड है। इतने ही परमिट इनके साथ जाने वाले शेरपा समुदाय के गाइड को जारी किए गए।
नेपाल पर्वतारोहण संघ के महासचिव कुल बहादुर गुरुंग ने बताया कि एवरेस्ट पर इस समय काफी लोग मौजूद हैं, जो नहीं होने चाहिए थे। वहीं, तीन बार एवरेस्ट पर चढ़ चुके वाशिंगटन के एरिक मर्फी ने कहा कि यहां हर एक मिनट कीमती है।
अनुभवहीन पर्वतारोहियों की वजह से 12 घंटे की बजाय 17 घंटे का समय लग रहा है क्योंकि उनकी मदद या मार्गदर्शन के लिए कोई गाइड मौजूद नहीं है। वहीं, नेपाल के पर्यटन एवं नागरिक विमानन मंत्रालय के सचिव मोहन कृष्णा सपकोता ने कहा कि परमिट जारी करने के लिए नेपाल में कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं। इसलिए कोई भी व्यक्ति डॉक्टर का सर्टिफिकेट दिखाकर 11000 अमेरिकी डॉलर की फीस अदा कर इसे हासिल कर सकता है।