बांग्लादेश में एक विशेष अदालत ने एक प्रमुख विपक्षी नेता और सांसद सलाउद्दीन कादेर चौधरी को 1971 में आजादी की लड़ाई के दौरान युद्ध अपराध का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है।
सलाउद्दीन चौधरी बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) के पहले नेता हैं जिन पर युद्ध अपराध का मुकदमा चलाया गया था।
अदालत ने 23 आरोपों में से उन्हें नौ में दोषी करार दिया जिनमें हत्या, नरसंहार जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
बीएनपी कहती रही है कि ये मुकदमा राजनीति से प्रेरित है।
इससे पहले यही विशेष अदालत कई इस्लामी धार्मिक नेताओं को 1971 की आजादी की लड़ाई के दौरान युद्ध अपराध का दोषी करार दे चुकी है। अदालत के फैसले के बाद बांग्लादेश में कई विरोध प्रदर्शन हुए थे।
समाज में विभाजन
अवामी लीग की अगुवाई वाली सरकार ने 2010 में युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल का गठन किया था। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि सरकार ने अपने राजनीतिक विरोधियों को फंसाने के लिए विशेष अदालत का गठन किया है।
कई मानवाधिकार संगठनों ने भी कहा है कि ये ट्राइब्यूनल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है।
अदालत के फैसले के मद्देनजर राजधानी ढाका और सलाउद्दीन चौधरी के गृह जिला चटगांव में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
जानकारों के अनुसार ट्राइब्यूनल के फैसले ने बांग्लादेश समाज में विभाजन को साफ उजागर कर दिया है।
पिछले महीने जब सुप्रीम कोर्ट ने जमात-ए-इस्लामी के एक वरिष्ठ नेता अब्दुल कादेर मुल्ला को मौत की सजा सुनाई थी तो कई जगहों पर फैसले के विरोध और समर्थन में प्रदर्शन हुए थे।
पिछले कुछ महीनों में अदालत के फैसले ने जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों और सरकार समर्थक गुटों को एक दूसरे के आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया है।