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'चीनी शासक कानून के दायरे में ही राज करें'

Thu, 27 Dec 2012 08:46 AM IST
बीबीसी हिंदी
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चीन में सत्तर से ज्यादा विद्वानों और वकीलों ने सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के नए नेताओं से राजनीतिक सुधारों की अपील की है।
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खबर है कि पेकिंग यूनिवर्सिटी में कानून एक प्रोफेसर चांग छियानफान ने इस बारे में एक मसौदा तैयार किया है। हालांकि इसमें चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के शासन को खत्म करने की कोई मांग नहीं की गई है।

उनके हवाले से मीडिया खबरों में कहा गया है कि अगर बदलाव नहीं किए गए तो इससे चीन की क्रांति और व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने ये भी कहा है कि वो सुधारों को लेकर विभिन्न विचारों के बीच आम सहमति का प्रयास करेंगे।
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इस मसौदे पर हस्ताक्षर करने वाले एक स्वतंत्र चीनी अर्थशास्त्री चोंग ताचुन ने बीबीसी को बताया कि चीन के नेतृत्व को सार्वभौमिक मूल्यों का सम्मान करना होगा।

किन सुधारों पर जोर
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार सुधारों के इस मसौदे में कम्युनिस्ट पार्टी से संविधान के मुताबिक शासन करने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण करने, निजी उद्यमों को बढ़ावा देने और स्वतंत्र न्यायापालिका की अनुमति देने को कहा है।

चांग ने कहा कि चीन के सामने मौजूद सामाजिक असमानता, सत्ता का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से निपटना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, "अगर चीन में बदलाव नहीं हुआ तो क्रांति खतरे में पड़ जाएगी और इससे अव्यवस्था फैलेगी।"

इस दस्तावेज में कुछ ऐसी भी मांगें हैं जो 2008 में तैयार 'चार्टर 08' में थी। हालांकि इस चार्टर में तो चीन में एक पार्टी के शासन को खत्म करने और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग की गई थी।
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इसी के कारण लियू शियाओबो को देशद्रोह में 11 साल की जेल हुई थी। बाद में उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया।

'बर्दाश्त नहीं' विरोध
हालांकि 25 दिसंबर को जारी सुधारों के ताजा मसौदे में हल्के अंदाज में कम्युनिस्ट से कानून के दायरे में रह कर शासन करने की अपील की गई है।

चांग का कहना है, “दरअसल ये हल्का है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इसे स्वीकार करेंगे और सरकार और लोगों के बीच संवाद शुरू किया जाएगा।”

चीन के कम्युनिस्ट शासकों ने 1989 में बीजिंग के थियानमन चौक पर लोकतंत्र समर्थक आंदोलन कुचलने के बाद अपनी सत्ता को मिलने वाली किसी भी राजनीतिक चुनौती को बर्दाश्त नहीं किया है।

वहां से अकसर सरकारी विरोधियों के दमन, उन्हें जेल में डालने जाने या निर्वासित कर दिए जाने की खबर आती हैं।
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