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चीनी हैकरों के निशाने पर फिर अमेरिका

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अमेरिकी अखबार 'न्यूयार्क टाइम्स' के मुताबिक चीन की सरकार की ओर से प्रायोजित हैकरों ने तीन महीने के अतंराल के बाद अमेरिका को निशाना बनाना एक बार फिर शुरू कर दिया है।
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इस साल फ़रवरी में कई अमेरिकी कंपनियों और संघीय एजेंसियों पर हुए साइबर हमले के स्रोत के रूप में चीनी सेना की यूनिट नंबर 61398 का नाम सामने आया था। इसका चीनी सरकार ने खंडन किया था. लेकिन चीन की ओर से प्रायोजित हमले में धीरे-धीरे कमी आ गई थी।

लेकिन न्यूयार्क टाइम्स की ख़बर के मुताबिक चीनी सेना की इस यूनिट ने अमेरिकी कंपनियों पर हमले फिर शुरू कर दिए हैं।

अति सुरक्षित

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी 'मैनडिएंट' ने अखबार से कहा कि माना जाता है कि चीनी सेना की यह यूनिट शंघाई के उपनगरीय इलाके की एक अतिसुरक्षा वाली इमारत से अपना काम करती है। इस यूनिट ने हाल ही में अपनी गतिविधियां फिर शुरू कर दी हैं। कंपनी ने उन कंपनियों और एजेंसियों के नाम बताने से इनकार किया जिन पर हमला किया गया।
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इस साल के शुरू में 'मैनडिएंट' ने विस्तृत सबूत प्रकाशित किए थे, जिनके मुताबिक़ अमरीकी संघीय एजेंसियों और औद्योगिक संगठनों पर बड़े पैमाने पर हुए साइबर हमलों के पीछे यूनिट नंबर 61398 का ही हाथ था।

मैनडिएंट ने कहा था कि इन हमलों के दौरान बहुत से सरकारी दस्तावेज, बौद्धिक संपदा, ब्लूप्रिंट और बहुत से गोपनीय कागजात चुरा लिए गए थे।

इस रिपोर्ट के आने के बाद और ओबामा प्रशासन की निंदा के बाद इस यूनिट ने अपनी गतिविधियां कम कर दी थीं।

लेकिन अब मैनडिएंट ने अख़बार से कहा कि यह यूनिट फिर अपने काम पर लौट आई है। वह अपने पहले की क्षमता का केवल 70 फीसदी काम कर रही है।

बदला तरीका

कंपनी ने कहा है कि यह यूनिट ने अपने काम करने के तरीके को छुपाने के लिए दूर स्थित किसी कंप्यूटर तक पहुंच बनाने वाले उपकरण लगाने के लिए अलग-अलग कंप्यूटरों का उपयोग कर रही है।

अमेरिका को असली साइबर हमलावर बताते हुए चीन इन हमलों को प्रायोजित करने से लगातार इनकार करता रहा है। मैनडिएंट की रिपोर्ट को दोषपूर्ण बताते हुए चीन कहता रहा है कि इन आरोपों को साबित करने के लिए उसमें पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने इस साल 13 अप्रैल को बेजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अमरीका और चीन साइबर हमलों से निपटने के लिए एक साइबर सुरक्षा कार्यबल गठित करने पर सहमत हैं।

माना जा रहा है कि इस साल जुलाई में जब अमेरिकी राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चीन दौरे पर जाएंगे तो साइबर हमला चर्चा के मुख्य बिंदुओं में से एक होगा।
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