चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग के भारत दौरे को दोनों ही देशों की मीडिया में अच्छी कवरेज मिल रही है लेकिन उनकी आवाजों में उठ रहे अतंर महसूस किया जा सकता है।
एक ओर जहां चीनी मीडिया में ली कचियांग की भारत यात्रा को लेकर खासी वरीयता दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर भारत के समाचार माध्यम सावधानी के साथ उम्मीदें जाहिर कर रहे हैं।
भारत में ज्यादातर अखबारों ने ली के साथ बातचीत की टेबल पर सीमा विवाद, कारोबार और पानी के बंटवारे जैसे मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ‘साफगोई’ को तवज्जो दी है.
टाइम्स और इंडिया अखबार लिखता है कि मनमोहन सिंह ने दोनों देशों में बहने वाली नदियों पर बनाए जा रहे बांध को लेकर चीन से अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
इंडियन एक्सप्रेस ने लद्दाख क्षेत्र में हाल ही में दोनों देशों के बीच पैदा हुए सीमा विवाद के मुद्दे को उठाया है। अखबार ने लिखा है, “अतिक्रमण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री का सख्त रवैया।”
व्यापारिक संतुलन
एक्सप्रेस के मुताबिक मनमोहन सिंह ने चीनी प्रधानमंत्री से कहा है कि सीमा पर अमन और शांति दोनों देशों के रिश्तों की बुनियाद है और इसे बरकरार रखा जाना चाहिए।
विश्लेषक राजेश गोपालन ने इकॉनॉमिक टाइम्स में लिखा है, “भारत के नीति निर्धारकों को सीमा विवाद पर जारी बातचीत को आगे ले जाने और चीन के साथ रिश्तों के अन्य पहलुओं में सुधार लाने की संभावना को लेकर खुले दिल से विचार करने की जरूरत है। लेकिन इसके साथ ही नई दिल्ली को यह भी समझने की जरूरत है कि ली के दौरे का नतीजा चाहे कुछ भी हो लेकिन चीन भारत के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा। चीन के साथ बेहतर संबंधों के लिए भारत को कुछ कुर्बान करने की जरूरत नहीं है।”
कारोबार के मुद्दे पर हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन बनाने के इरादे से चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए रास्ता दिए जाने की मांग की है।
लेकिन इसी अखबार के एक लेख में विश्लेषक जयदेव रनाडे ने चीन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किए जाने को लेकर सावधान किया है।
दो विशाल अर्थव्यवस्थाएं
उन्होंने लिखा है, “भारत को यह याद रखना चाहिए कि कई मौकों पर चीन ने अपने कारोबारी रिश्तों का इस्तेमाल करते हुए दबाव की रणनीति अपनाई है।”
हालांकि इन सब बातों से इतर टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक हल्की खबर की ओर ध्यान दिलाया है कि ली कचियांग ने डिनर टेबल पर शाकाहारी खाने का विकल्प चुनकर कई लोगों को चौंका दिया। उनके व्यक्तित्व से कई लोग प्रभावित हुए हैं।
दूसरी तरफ चीन का सरकारी मीडिया ली कचियांग के भारत दौरे को एशिया की दो विशाल अर्थव्यवस्थाओं के बीच की जुगलबंदी की तरह पेश कर रहा है।
चाइना सेंट्रल टेलीविजन, लिबरेशन आर्मी डेली, चाइना डेली और दूसरे समाचार माध्यमों ने कारोबारी सौदों को ज्यादा तवज्जो दी है और दोनों देशों के दरम्यां हाल ही में सीमा विवाद की घटनाओं को हाशिए पर ही रखा है।
ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारत और चीन के सीमा विवाद को लेकर पश्चिम और मीडिया की तरफ से हालात को बढ़ा चढ़ाकर पेश किए जाने के बावजूद दोनो देशों ने बातचीत को पटरी से उतरने नहीं दिया।
शिनहुआ के रिपोर्टर जियांग यापिंग कहते हैं, “यह मानने के कारण हैं कि ली कचियांग के दौरे से भारत और चीन की रणनीतिक भागीदारी मजबूत होगी और इसका फायदा एशिया और दुनिया की समृद्धि और विकास को पहुंचेगा।”
वेन वी पो हांगकांग से प्रकाशित होता है और इसे बीजिंग समर्थक अखबार माना जाता है।
इस अखबार ने लिखा है, “चीन की तरक्की को रोकने के लिए अमेरीका, जापान और अन्य देशों ने हाल के सालों में दोनों देशों के बीच के मतभेदों को हवा दी है।”