बांग्लादेश में सूफी दरगाह के कार्यवाहक रहमत अली की हत्या के मामले में निओ-जेएमबी आतंकी समूह के क्षेत्रीय प्रमुख समेत सात आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इन पर 2015 में रहमत अली की हत्या का आरोप था।
आतंकियों ने 10 नवंबर 2015 को इनकी गला रेतकर हत्या कर दी थी। आतंकी समूह आधुनिक सूफी दर्शन के मतों के खिलाफ थे। पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पिछले साल 16 अगस्त को अदालत ने इन्हें दोषी करार दिया था। रंगपुर स्थित एक अदालत ने नियो-जेएमबी क्षेत्रीय कमांडर मसूद राणा समेत सात आतंकियों को हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई।
गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार (13 मार्च) को दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश में स्थित एक अदालत ने सत्ताधारी आवामी लीग के 39 कार्यकर्ताओं को मौत की सजा दी थी। इन सभी को चार साल पहले अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेता की नृशंस हत्या का दोषी पाया गया था। बता दें कि घटना 20 मई, 2014 की थी।
फेनी कस्बे के एकेडमी इलाके में आवामी लीग के स्थानीय अध्यक्ष एकरामुल हक को दिनदहाड़े उनकी ही कार में शरारती तत्वों द्वारा काट डाला गया, गोली मारी गई और जिंदा जला दिया गया। सरकारी वकील ने बताया कि एक अकेले मामले में अदालत ने 39 लोगों को मौत की सजा दी। सभी दोषी स्थानीय नेता और आवामी लीग के कार्यकर्ता हैं।