बता दें कि ये हमला राष्ट्रपति के उस आदेश के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने शनिवार को रमजान के दौरान सरकार की तरफ से घोषित किया गया सीजफायर खत्म हो जाने के कारण अफगान सुरक्षा बलों को तालिबान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
बता दें कि इस सीजफायर का तालिबान लड़ाकों ने स्वागत किया था और हथियार छोड़कर ईद के समारोह में सैन्य बलों व स्थानीय लोगों के साथ शामिल भी हुए थे। लेकिन आईएस आतंकियों ने इस समझौते को नहीं माना था और ईद के दौरान नांगरहार राज्य में ही समारोह करते लोगों के बीच आत्मघाती हमले कर दर्जनों लोगों को मार दिया था। इसके बाद तालिबान ने भी सीजफायर खत्म करने की घोषणा कर दी थी।
निशाने पर हैं सिख-हिंदू
-80 हजार सिख व हिंदू थे अफगानिस्तान में वर्ष 1970 में
-1000 सिख व हिंदू ही बचे हैं इस समय आतंक पीड़ित देश में
-60 हजार से ज्यादा सिख व हिंदू ले चुके हैं भारत में शरण अब तक, अन्य मारे गए या धर्म परिवर्तन करना पड़ा
-1990 में तालिबान शासन के दौरान सिख-हिंदुओं को पीले आर्मबैंड पहनकर अपनी पहचान दिखानी पड़ती थी