केंट रिज मिनिस्टीरियल फोरम में पूर्व पीएम ली सियन लूंग ने कहा कि सिंगापुर को शक्तिशाली बाहरी ताकतें बहुत अलग दिशाओं में खींच रही हैं। हमारा काम इसका विरोध करना है और यह याद रखना है कि मैं मुस्लिम हूं या मैं चीनी हूं या मैं भारतीय हूं, लेकिन मैं सिंगापुरी भी हूं।
वैश्विक तनाव के बीच सिंगापुर के पूर्व पीएम ने अपने देश के लोगों से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बाहरी ताकतों का विरोध करें और एक मजबूत राष्ट्रीय पहचान बनाए रखें। केंट रिज मिनिस्टीरियल फोरम में पूर्व पीएम ली सियन लूंग ने कहा कि सिंगापुर को शक्तिशाली बाहरी ताकतें बहुत अलग दिशाओं में खींच रही हैं।
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वैश्वीकरण को या घरेलू दोषों को राष्ट्रीय पहचान की भावना के लिए बड़ी चुनौती मानने के सवाल पर ली ने कहा कि मुसलमान स्वाभाविक रूप से इस्राइल और हमास के बीच युद्ध को लेकर अधिक परेशान हैं। मगर भारत या चीन में होने वाले घटनाक्रम का उन समुदायों पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। हमारा काम इसका विरोध करना है और यह याद रखना है कि मैं मुस्लिम हूं या मैं चीनी हूं या मैं भारतीय हूं, लेकिन मैं सिंगापुरी भी हूं। यहां मेरा कुछ स्थान है। मैं यहां का निवासी हूं तथा मुझे यहीं से दुनिया को देखना चाहिए।
सिंगापुर राष्ट्रीय विवि के छात्रों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए सिंगापुर के तीसरे प्रधानमंत्री रहे ली ने कहा कि हर पीढ़ी को अपने संकटों से पार पाना होगा। इन्हीं चुनौतियों के माध्यम से सिंगापुर की राष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी। सिंगापुर की पहचान पहले से अधिक मजबूत है और अब उसे महाशक्तियों के बीच प्रतिद्वंद्विता और भू-राजनीतिक व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पहचान बहुस्तरीय है। हम एक लोग हैं, लेकिन... हम सभी एक जैसे नहीं हैं और कुछ खामियां हैं जिनसे हमें बचना है। केवल सिंगापुरी होना किसी व्यक्ति की पहचान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं है। हम चीनी सिंगापुरी, मलय सिंगापुरी या भारतीय सिंगापुरी भी हैं। हम ईसाई, मुसलमान या बौद्ध भी हैं।
उन्होंने कहा कि आपके राजनीतिक विचार भी अलग-अलग हो सकते हैं। आप सरकार समर्थक हो सकते हैं, आप विपक्ष समर्थक भी हो सकते हैं। आपकी यौन प्रवृत्तियां अलग-अलग हो सकती हैं और इसलिए आपके मित्र मंडली और दुनिया के प्रति आपके नजरिए भी अलग-अलग हो सकते हैं। ये सब हमारी पहचान की अलग-अलग परतें हैं, जो हमेशा मौजूद रहती हैं।