कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल डेक्सामेथासॉन दवा किस मरीज पर ज्यादा असर करेगी, इसका पता रक्त की जांच से चलेगा। कोरोना से बुरी तरह प्रभावित रहे न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि रक्त में सी-रिएक्टिव प्रोटीन की ज्यादा मात्रा वाले मरीजों में ये दवा बेहतर असर करेगी।
अलबर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों का कहना है कि सी-रिएक्टिव प्रोटीन की मात्रा अधिक होने का मतलब इम्यून सिस्टम से हुई सूजन है। सी-रिएक्टिव प्रोटीन की ज्यादा मात्रा वाले मरीजों के इलाज में डेक्सामेथासॉन से जान का खतरा कम रहता है। स्वस्थ प्रोटीन वाले मरीजों को दवा से नुकसान हो सकता है।
35 फीसदी मरीजों की बचा सकते हैं जिंदगी
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दवा से वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी से जंग लड़ रहे 35 फीसदी मरीजों को बचाया जा सकता है। ऑक्सीजन के अभाव में जान गंवाने वाले मरीजों की भी संख्या कम की जा सकती है।
मालूम हो कि कोरोना की चपेट में आकर गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों के शरीर के भीतर सूजन हो जाती है। सूजन के कारण फेफड़े और दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं।