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शोध : 16 करोड़ महिलाओं ने जरूरत के बावजूद नहीं किया गर्भनिरोधक का इस्तेमाल

Sat, 23 Jul 2022 05:41 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च डेस्क, वाशिंगटन।

सार

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का अध्ययन दुनियाभर में गर्भनिरोधक के इस्तेमाल, जरूरत, तरीके और उपलब्धता पर एक अनुमान बताता है। अध्ययन में 1,162 सर्वेक्षणों के आंकड़ों का उपयोग हुआ। इनमें 1970 से 2019 तक विभिन्न देशों, आयु समूह, वैवाहिक स्थिति के आधार पर महिलाओं के आंकड़े हैं।
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गर्भनिरोधक गोलियां
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विस्तार
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अनचाहा गर्भधारण रोकने की जरूरत के बावजूद दुनियाभर में 16 करोड़ महिलाओं और किशोरियों ने 2019 में गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल नहीं किया। यह जानकारी प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका लैंसेट में छपे एक शोध में सामने आई है, जो बीते पांच दशकों से गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल पर जोर दिए जाने के बावजूद वैश्विक जमीनी हकीकत से रूबरू कराती है। 

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, वैसे तो दुनिया में आधुनिक गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल करने वाली प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं की तादाद 1970 में मात्र 28 फीसदी थी, जो 2019 में बढ़कर 48 फीसदी पहुंच गई। इसी तरह, 1970 में 55 फीसदी मांग पूरी हो रही थी तो 2019 में यह आंकड़ा 79 फीसदी हो गया। लेकिन इस बढ़ोतरी के बावजूद तीन साल पहले 16.3 करोड़ ऐसी महिलाएं रहीं, जिन्होंने जरूरत के बावजूद गर्भ निरोधक नहीं अपनाए।

  • अनचाहा गर्भ रोकने पर लैंसेट में छपे शोध में खुलासा
  • दुनिया में 2019 में गर्भनिरोधकों के उपयोग की 1970 से तुलना
  • बताया, गर्भनिरोधक नहीं अपनाना महिला सशक्तिकरण में बन रहा बाधक

1162 सर्वे के आंकड़ों का किया उपयोग
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का अध्ययन दुनियाभर में गर्भनिरोधक के इस्तेमाल, जरूरत, तरीके और उपलब्धता पर एक अनुमान बताता है। अध्ययन में 1,162 सर्वेक्षणों के आंकड़ों का उपयोग हुआ। इनमें 1970 से 2019 तक विभिन्न देशों, आयु समूह, वैवाहिक स्थिति के आधार पर महिलाओं के आंकड़े हैं।

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मृत्यु दर कम करना, महिला सशक्तीकरण मकसद
गर्भ निरोधकों तक पहुंच का संबंध महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण व बेहतर स्वास्थ्य नतीजों से जुड़ा है। अनचाहा गर्भधारण रोककर मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना भी इस अध्ययन का मकसद है।

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