मानव तस्करी पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की नई रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर तस्करी का खतरा अधिक है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पाकिस्तान ने मानव तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। इसलिए उसे श्रेणी-2 की निगरानी सूची में डाला गया है। वहीं रिपोर्ट में मानव तस्करी के खिलाफ भारत के प्रयासों की सराहना की गई। हालांकि न्यूनतम मानकों पर नहीं पहुंचने के कारण भारत को श्रेणी-2 में ही रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आतंकी संगठन 12 साल तक के बच्चों को अगवा कराते हैं और उन्हें बाद में जासूसी के काम पर लगाया जाता है। इन बच्चों को दहशत फैलाने के लिए आत्मघाती हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इनसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हमले कराया जाते हैं। अफगानी स्कूल में दाखिले के नाम पर तस्करी कर लाए गए बच्चों को अफगानिस्तान में बच्चा बाजी के लिए भी बेचा जाता है।
रिपोर्ट में मानव तस्करी रोकने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना की गई। इसमें खासतौर पर बिहार में सरकारी मदद प्राप्त आश्रय गृह में बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रशंसा की गई। इस मामले में राज्य सरकार के तीन अधिकारियों समेत 19 लोगों को दोषी ठहराया गया। एक पूर्व विधायक समेत 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई।
रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सरकार विरोधी गतिविधियों के लिए 14 साल तक के किशोरों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके लिए बकायदा बच्चों की भर्ती की जाती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी माओवादी समूहों द्वारा किशोरों को भर्ती करने का जिक्र किया गया।