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भारत ने मानव तस्करी रोकने के लिए उठाए महत्वपूर्ण कदम: रिपोर्ट

Sat, 27 Jun 2020 06:03 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • पाकिस्तान में धार्मिक व जातीय अल्पसंख्यकों पर तस्करी का खतरा अधिक 
  • मानव तस्करी रिपोर्ट में पाकिस्तान को श्रेणी दो की निगरानी सूची में डाला
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Human Trafficking - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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मानव तस्करी पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की नई रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर तस्करी का खतरा अधिक है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पाकिस्तान ने मानव तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। इसलिए उसे श्रेणी-2 की निगरानी सूची में डाला गया है। वहीं रिपोर्ट में मानव तस्करी के खिलाफ भारत के प्रयासों की सराहना की गई। हालांकि न्यूनतम मानकों पर नहीं पहुंचने के कारण भारत को श्रेणी-2 में ही रखा गया है।

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विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने  गुरुवार को 2020 के लिए मानव तस्करी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान में बच्चे और धार्मिक अल्पसंख्यक सबसे अधिक खतरे में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा और श्रीलंका से बड़ी संख्या में महिलाओं बच्चों और पुरुषों को तस्करी कर लाया जाता है।

इन लोगों से जबरन मजदूरी कराई जाती है। इसके अलावा ईसाई, हजारा, जाति के अल्पसंख्यकों को भी तस्करी कर लाया जाता है। इस रिपोर्ट में देशों को चार वर्ग- श्रेणी-1, श्रेणी-2, श्रेणी-2 निगरानी सूची और श्रेणी-3 में बांटा जाता है।

  • आतंकी संगठन बच्चों को अगवा कर जासूस बना रहे

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आतंकी संगठन 12 साल तक के बच्चों को अगवा कराते हैं और उन्हें बाद में जासूसी के काम पर लगाया जाता है। इन बच्चों को दहशत फैलाने के लिए आत्मघाती हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इनसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हमले कराया जाते हैं। अफगानी स्कूल में दाखिले के नाम पर तस्करी कर लाए गए बच्चों को अफगानिस्तान में बच्चा बाजी के लिए भी बेचा जाता है।  

  • भारत के प्रयासों की सराहना

रिपोर्ट में मानव तस्करी रोकने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना की गई। इसमें खासतौर पर बिहार में सरकारी मदद प्राप्त आश्रय गृह में बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रशंसा की गई। इस मामले में राज्य सरकार के तीन अधिकारियों समेत 19 लोगों को दोषी ठहराया गया। एक पूर्व विधायक समेत 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई।

  • कश्मीर में सरकार के खिलाफ हो रहा किशोंरो का इस्तेमाल

रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सरकार विरोधी गतिविधियों के लिए 14 साल तक के किशोरों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके लिए बकायदा बच्चों की भर्ती की जाती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी माओवादी समूहों द्वारा किशोरों को भर्ती करने का जिक्र किया गया।

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