जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक के बीच अमेरिका का भारत के साथ संबंधों को लेकर बयान सामने आया है। वॉशिंगटन ने कहा कि नई दिल्ली के साथ उसके संबंध केवल सुरक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। बल्कि यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं, जो कई क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैले हुए हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हिंदुस्तानी प्रवक्ता मार्गरेट मैकलियोड ने कहा, "मुझे लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध क्वाड से बड़े हैं। क्वाड सिर्फ एक कुछ देशों का एक समूह है, जो एक विशेष क्षेत्र पर केंद्रित है। लेकिन जब हम भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों की बात करते हैं, तो हम महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगियों पर काम करने, मालाबार अभ्यास, लोगों के आपसी संबंधों, शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने और हमारे संबंधों को मजबूत करने के बार में बात कर रहे होते हैं।"
मंत्रालय की अधिकारी ने एक इंटरव्यू में न केवल दोनों देशों के बीच लोगों के मजबूत आपसी संबंधों का जिक्र किया, बल्कि इस बारे में विस्तार से बात की की कि अमेरिका इस समूह में भारत की भूमिका को किस तरह देख रहा है। उन्होंने कहा, "भारत और अमेरिका कई नई तकनीकों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम शिक्षा के क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा रिश्ता बहुत मजबूत है। हमारे यहां अमेरिका में भारतीय प्रवासी हैं, जो एक सेतु के रूप में दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी योगदान दे रहे हैं।"
मैकलियोड ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे ओपन आरएएन (रेडियो एक्सेस नेटवर्क) की विश्वसनीयता है और यह बेहतर कीमतों पर आएगा। उन्होंने कहा कि यह भारतीय प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर होगा। उन्होंने आगे कहा, अगर आप आज के संयुक्त बयान को देखें, तो भारत अहम भूमिका में नजर आएगा। उन्होंने कहा, यह ध्यान रखना जरूरी है कि क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों ने अपने साझा बयान में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों की बदलावकारी ताकत को माना है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास का समर्थन करने के लिए जरूरी है।