यहां यह आम चर्चा है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक आठ महीनों के अंदर यह माहौल में आया नाटकीय बदलाव है। पिछले साल अगस्त में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमाया था, तब उसकी इस कामयाबी के पीछे पाकिस्तान का हाथ देखा गया था। लेकिन गुजरे महीनों में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते बिगड़ते गए हैँ। अब दोनों एक दूसरे को दुश्मन के रूप में देख रहे हैँ।
टीटीपी और बरादर गुट जैसे समूहों के हमले रोकने के लिए ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से लगी अपनी 2,700 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाई है। लेकिन बाड़ लगाने को लेकर तालिबान और पाकिस्तान के बीच टकराव बढ़ गया है। अफगानिस्तान की अब तक किसी सकरार ने डूरंड लाइन नाम से जानी जाने वाली इस सीमा को स्वीकार नहीं किया है। तालिबान का कहना है कि औपनिवेशिक जमाने में खींची गई रेखा को पाकिस्तान जबरन सीमा के रूप में थोपने की कोशिश कर रहा है।
खबरों के मुताबिक दोनों देशों में बढ़ते टकराव के बीच पाकिस्तान में तालिबान समर्थक समूहों में बेचैनी बढ़ रही है। शनिवार को हुए हमलों के बाद पाकिस्तान की नेशनल डेमोक्रेटिक मूवमेंट पार्टी के अध्यक्ष मोहसीन डावर ने इस बात की जांच कराने की मांग की कि खोश्त और कुनार में हमलों के आदेश किसने दिए।
खोश्त इलाके में ज्यादातर वजीरीस्तान के मदाखेल कबीले के लोग रहते हैं। वजीरिस्तान स्थित जमीयत-ए-उलेमा-ए-इस्लाम-ए-फजल के नेता मौलाना नेक जुमार खाकनी ने कहा है कि हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों के मारे जाने से दुनिया में पाकिस्तान की छवि खराब होगी। इससे उग्रवाद और भड़केगा। उधर अफगानिस्तान में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के मिशन ने भी हवाई हमलों पर एतराज जताया है। एक ट्विट में मिशन ने निहत्थे लोगों के मारे जाने पर गहरी चिंता जताई है।