अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति भारतीय पीएम मोदी के साथ।
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भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसी ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सामने लोकतांत्रिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारत और अमेरिका को मिलकर काम करने की जरूरत है। साथ ही अपनी ताकत का लाभ उठाकर सत्तावादी चीनी मॉडल का व्यवहार्य विकल्प प्रदान करना होगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की पहली राजकीय यात्रा से पहले आई है। गौरतलब है, पीएम मोदी राष्ट्रपति जो बाइडन के निमंत्रण पर अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं।
राजनीति से कई ऊपर भारत- अमेरिका के संबंध
कृष्णमूर्ति ने कहा कि मुझे लगता है कि पीएम मोदी की यात्रा अमेरिका-भारत संबंधों की ताकत का प्रतीक है और ये राजनीति से कई ऊपर है। उन्होंने कहा कि हमें इस रिश्ते को और मजबूत करना होगा। साथ ही सुनिश्चित करना होगा कि हम इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।
बिखर न जाए लोकतांत्रिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था
उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए कि एक तेजी से आक्रामक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सामने लोकतांत्रिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बिखर न जाए। यह कार्य अकेले अमेरिका का नहीं है। हमें भारत जैसे देशों की भी जरूरत है।
नाटो प्लस का सदस्य बने भारत
संयुक्त राज्य अमेरिका और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर सदन की चयन समिति ने अध्यक्ष माइक गैलाघेर और सदस्य राजा कृष्णमूर्ति के नेतृत्व में नाटो प्लस को मजबूत करने के लिए भारत को शामिल करने वाले एक प्रस्ताव को अपनाया गया। बता दें कि नाटो प्लस 5 के सदस्य ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इजरायल और दक्षिण कोरिया हैं। कहा जा रहा है कि अगर नाटो प्लस 5 में भारत को शामिल किया जाता है तो देशों के खुफिया जानकारी साझा करने में सुविधा होगी।
49 वर्षीय कृष्णमूर्ति ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हमें इस बात पर चर्चा करनी होगी कि हम भारत-प्रशांत क्षेत्र के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत करें। हम अपनी ताकत का लाभ कैसे उठा सकते हैं। हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम दूसरों के बीच उस क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम हैं।