वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ को 18 मिलियन यूरो (लगभग डेढ़ अरब रुपये) का नुकसान हो सकता है। लॉर्ड चेंबरलेन ने एक ईमेल में कर्मचारियों को इसे लेकर चेतावनी दी है। कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए शाही महल पर्यटकों के लिए बंद है और दुनियाभर में कई तरह के प्रतिबंध लागू है।
शाही महल देखने के लिए आने वाले पर्यटकों से महारानी को चार मिलियन यूरो (40 लाख रुपये) मिलते हैं। लॉर्ड चेंबरलेन अर्ल पील जो शाही राजघराने के प्रमुख हैं, उन्होंने कर्मचारियों को लिखे ईमेल में स्वीकार किया कि शाही आय में इस साल एक तिहाई की गिरावट होने की उम्मीद है।
उन्होंने कर्मचारियों को लिखे पत्र में यह भी बताया कि तनख्वाह पर रोक लग सकती है, साथ ही नियुक्ति पर भी रोक लग सकती है। पिछले साल, शाही राजघराने को टिकट और स्मारिका बिक्री से 70 मिलियन यूरो (लगभग साढ़े अरब रुपये) से अधिक की कमाई हुई थी।
राजघरानों को क्राउन एस्टेट्स से लाखों की कमाई होती है। हालांकि लॉकडाउन की वजह से आय में काफी गिरावट आएगी। बकिंघम पैलेस एक साल में करीब 12 मिलियन यूरो (लगभग एक अरब रुपये), विंडसर कैसल 25 मिलियन यूरो (लगभग दो अरब रुपये), एडिनबर्ग का होलीरूडहाउल 5.6 मिलियन यूरो (लगभग 46 करोड़), द रॉयल म्यूज 1.6 मिलियन यूरो (लगभग 13 करोड़ रुपये) और क्लेरेंस हाउस 132,000 यूरो (लगभग एक करोड़ रुपये) की कमाई होती है।
महारानी को 350 मिलियन यूरो (लगभग 28 अरब रुपये) मिलते हैं। वहीं करदाताओं द्वारा राजघराने को पिछले साल सोवरन ग्रांट के तौर पर 82.4 मिलियन यूरो (लगभग छह अरब रुपये) का भुगतान किया था। पत्र में लॉर्ड चेंबरलेन ने लिखा है कि संकट ने हमारे लचीलेपन, अनुकूलशीलता और तैयारियों को कई स्तर पर परखा है। इसका शाही राजघराने की गतिविधियों पर भी विशिष्ट प्रभाव पड़ा है।
शाही राजघराने में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है। उन्हें तनख्वाह रोके जाने और नियुक्ति न होने के बारे में सूचित कर दिया गया है। बता दें कि शाही राजघराने में 500 से ज्यादा कर्मचारी कार्य करते हैं।