संयुक्त अरब अमीरात ने अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक बहुराष्ट्रीय समुद्री टास्क फोर्स में हिस्सा लेगा। यूएई दर्जनों देशों को एक 'होर्मुज सुरक्षा बल' बनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहा है, जिससे इस समुद्री रास्ते को ईरानी हमलों से बचाया जा सके और जहाजों को सुरक्षा दी जा सके।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में इस्राइल सहित अन्य देशों की तुलना में यूएई को ईरानी हमलों का ज्यादा सामना करना पड़ा है। वहीं, अमेरिका के कई सहयोगियों ने कहा कि होर्मुज को खोलने के लिए जहाज भेजने की उनकी कोई तत्काल योजना नहीं है। इस तरह, उन्होंने होर्मुज जलमार्ग को खुला रखने के लिए सैन्य सहायता की ट्रंप की अपील को ठुकरा दिया है।
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संयुक्त राष्ट्र ने भी शुरू की है पहल
रायटर्स ने इस सप्ताह की शुरुआत में बताया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए प्रस्तावों पर बातचीत शुरू कर दी है, जिसमें बहरीन का एक मसौदा भी शामिल है, जो सभी आवश्यक साधनों के उपयोग को अधिकृत करेगा।
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यूएई की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है होर्मुज
पिछले सप्ताह, यूएई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयास में यूएई शामिल हो सकता है, क्योंकि ईरान ने जहाजों के लिए इस जलमार्ग को लगभग पूरी तरह से बंद कर दिया था। यह जलमार्ग यूएई की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी भीषण तनाव ने इस समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से ईरान ने इस संकरे रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे दुनिया भर में होने वाली तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई 90% तक ठप हो गई है।
यूएई का कड़ा रुख
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के सुल्तान अल-जाबेर ने ईरान की इस हरकत को सीधे तौर पर 'आर्थिक आतंकवाद' बताया है। उनका मानना है कि इस नाकेबंदी से केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की रसोई और गाड़ियों का बजट बिगड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी है।
सैन्य गठबंधन की तैयारी
रिपोर्टों के अनुसार, यूएई अब केवल कागजों पर विरोध दर्ज नहीं कराएगा। वह अपनी आधुनिक नौसेना को उस बहुराष्ट्रीय टास्क फोर्स में तैनात करने की योजना बना रहा है। यह टास्क फोर्स कमर्शियल जहाजों को हथियारों के साये में सुरक्षा देगी। यूएई दर्जनों देशों के साथ मिलकर एक ऐसा 'होर्मुज सुरक्षा बल' बनाने की वकालत कर रहा है, जो ईरानी खतरों, ड्रोनों और मिसाइल हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे सके।
कूटनीतिक मोर्चे पर घेराबंदी
इतना ही नहीं, यूएई और बहरीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी एक प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य 'सभी जरूरी कदम' उठाकर समुद्री व्यापार को सुरक्षित करना है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि रूस और चीन इस मामले में वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे स्थिति और भी पेचीदा हो सकती है।