अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन और आसपास के इलाकों में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर में तेज केमिकल जैसी गंध आने के कारण कई बड़े एयरपोर्ट्स पर उड़ानों को रोकना पड़ा। अचानक लिए गए इस फैसले से यात्रियों को भारी परेशानी हुई और पूरे इलाके में हवाई सेवाएं कुछ समय के लिए ठप हो गईं। यह घटना सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल भी खड़े कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, संघीय अधिकारियों ने बताया कि पोटोमैक ट्रैकन सेंटर में तेज रसायनिक दुर्गंध महसूस की गई, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए कई एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट ऑपरेशन रोक दिए गए। जिन एयरपोर्ट्स पर असर पड़ा, उनमें रोनाल्ड रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट, वॉशिंगटन डलेस इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बाल्टीमोर-वॉशिंगटन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, शार्लोट्सविल-अलबेमार्ले एयरपोर्ट और रिचमंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं। यह सेंटर इन सभी क्षेत्रों की हवाई यातायात व्यवस्था संभालता है।
क्यों यहां से कंट्रोल होता है ट्रैफिक?
पोटोमैक ट्रैकन एक टर्मिनल रडार अप्रोच कंट्रोल सुविधा है, जो वॉशिंगटन और आसपास के कई बड़े एयरपोर्ट्स की उड़ानों को कंट्रोल करती है। यहां से तय होता है कि कौन सी फ्लाइट कब लैंड करेगी और कब उड़ान भरेगी। ऐसे में यहां किसी भी तरह की तकनीकी या सुरक्षा समस्या का सीधा असर पूरे क्षेत्र की हवाई सेवाओं पर पड़ता है।
रसायनिक गंध की वजह क्या थी?
फिलहाल इस गंध के पीछे की सटीक वजह साफ नहीं हो पाई है। हालांकि, अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर तुरंत उड़ानों को रोक दिया। बाद में जांच और सुरक्षा जांच के बाद हालात सामान्य होने लगे। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की प्रवक्ता क्रिस्टन एल्सोप ने बताया कि कंट्रोलर धीरे-धीरे काम पर लौट रहे हैं और उड़ानें जल्द सामान्य हो जाएंगी।
क्या पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना?
यह इस महीने दूसरी बार है जब इसी तरह की रसायनिक दुर्गंध के कारण उड़ानों को रोकना पड़ा है। इससे पहले भी करीब एक घंटे के लिए उड़ानें बंद करनी पड़ी थीं। उस समय जांच में पता चला था कि एक सर्किट से तेज गंध आ रही थी। बाद में दमकल विभाग ने पुष्टि की थी कि कोई बड़ा खतरा नहीं है, तब जाकर ऑपरेशन फिर से शुरू किया गया था।
बार-बार इस तरह की घटनाएं सामने आने से एयर ट्रैफिक सिस्टम की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों और स्टाफ की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। जांच जारी है और कोशिश की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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