36 साल पुराने चुनाव से जुड़े एक मामले में टिप्पणी करने के बाद विवादों में घिरे केरल के वरिष्ठ नेता पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता जी सुधाकरन की एक वीडियो सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को मामले की जांच शुरू की थी।
केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता जी सुधाकरन के खिलाफ शुक्रवार को जनप्रतिनिधित्व कानून व भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। पूर्व मंत्री सुधाकरन पर यह कार्रवाई उनके 1989 के अलप्पुझा लोकसभा चुनाव के दौरान डाक मतपत्र खोले जाने वाले हालिया बयान पर की गई है। बाद में सफाई देते हुए माकपा नेता ने कहा, उन्होंने जो कहा था वह पूरा सच नहीं था।
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वीडियो सामने आने के बाद चुनाव आयोग कर रहा जांच
सुधाकरन के 1989 में डाक मतपत्र खोले जाने के दावे वाला वीडियो सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को मामले की जांच शुरू की थी। टीवी चैनलों पर प्रसारित इस वीडियो में सुधाकरन को हिदायत देते हुए देखा जा सकता है कि पूर्व एनजीओ यूनियन नेताओं की सभा के सदस्यों को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को वोट नहीं देना चाहिए।
हमें पता नहीं चलेगा कि वोट किसे दिया गया, ऐसा मानना गलत
सुधाकरन ने कहा था कि जो लोग सीलबंद मतपत्र जमा करते हैं, उन्हें यह नहीं मानना चाहिए कि हमें पता नहीं चलेगा कि उन्होंने किसे वोट दिया है क्योंकि हम उन्हें खोलेंगे, सत्यापित करेंगे और सही करेंगे। सुधाकरन ने दावा किया था कि जब केएसटीए नेता केवी देवदास ने अलप्पुझा से लोकसभा चुनाव लड़ा था, तो डाक मतपत्रों को खोला गया था और जिला समिति कार्यालय में उनकी जांच की गई थी। इसमें पाया गया कि एनजीओ यूनियन के 15 फीसदी सदस्यों ने विरोधी उम्मीदवार को वोट दिया था।
लोगों को चेतावनी देने के इरादे से की थी टिप्पणी
बयान पर विवाद होने के बाद सुधाकरन ने सफाई दी। एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि मैंने उस दिन जो कहा था, उसका उद्देश्य ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को एक छोटी सी चेतावनी देना था और उन्हें यह बताना था कि हम जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं।