पोप फ्रांसिस के प्रवास और विकास मामलों के प्रमुख कार्डिनल माइकल चेर्नी ने अमेरिका की ट्रंप प्रशासन की तरफ से प्रवासियों पर की जा रही सख्ती और यूएसएआईडी के बजट में कटौती पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से ईसाई मूल्यों को अपनाने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की। कार्डिनल चेर्नी, जो वेटिकन के प्रवासी, पर्यावरण और कैरिटास इंटरनेशनलिस जैसे चर्च सहायता संगठनों के प्रमुख हैं, ने कहा कि अमेरिका की नई नीतियों से प्रवासियों में डर का माहौल बन रहा है और चर्च संचालित महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रम खतरे में पड़ गए हैं।
यूएसएआईडी कटौती से संकट
यूएसएआईडी अमेरिका की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवीय और विकास एजेंसी है, जिसने 2023 में $40 बिलियन से अधिक की सहायता वितरित की थी। लेकिन ट्रंप प्रशासन और उनके सहयोगी अरबपति एलन मस्क ने इस एजेंसी पर कड़ा प्रहार किया है। अचानक हुई फंडिंग कटौती के कारण दुनिया भर में यूएसएआईडी के अधिकांश कार्यक्रम ठप हो गए हैं। हालांकि, एक संघीय न्यायाधीश ने शुक्रवार को अस्थायी रूप से इन कटौतियों पर रोक लगा दी है। यूएसएआईडी के सबसे बड़े गैर-सरकारी लाभार्थियों में से एक 'कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज' पहले ही इन कटौतियों पर चिंता जता चुका है।
कार्डिनल चेर्नी का कहना है कि सरकार को अपने बजट की समीक्षा करने का अधिकार है, लेकिन अचानक सहायता रोकने से गरीब और जरूरतमंद लोग बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार को यूएसएआईडी के कार्यक्रमों में कोई विचारधारा संबंधी समस्या लगती है, तो उसे पूरी तरह से बंद करने की बजाय सुधार करने की जरूरत है।
अमेरिका में प्रवासियों पर सख्ती
वेटिकन और अमेरिकी कैथोलिक समुदाय ट्रंप प्रशासन की तरफ से प्रवासियों के खिलाफ लिए जा रहे कड़े फैसलों को लेकर भी चिंतित हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने बताया कि ट्रंप प्रशासन के कार्यभार संभालने के बाद से 8,000 से अधिक प्रवासियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से कुछ को संघीय जेलों में रखा गया है, जबकि कुछ को ग्वांतानामो बे नेवल बेस पर रखा गया है।
कार्डिनल चेर्नी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न्याय की प्रक्रिया को ठेस पहुंचती है और प्रवासियों को आतंकित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम केवल यही आशा कर सकते हैं कि लोग, चाहे वे किसी भी धर्म या समाज से हों, इन कमजोर प्रवासियों की रक्षा करने में मदद करेंगे।'
कैथोलिक चर्च की प्रतिक्रिया
अमेरिकी कैथोलिक बिशप सम्मेलन ने भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों की आलोचना की है। उनका कहना है कि नए फैसले प्रवासियों, पर्यावरण, मृत्यु दंड के विस्तार और विदेशी सहायता को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे सबसे कमजोर वर्गों को नुकसान होगा। कैथोलिक चर्च प्रवासियों के प्रति सहानुभूति रखने की अपनी नीति पर कायम है। पोप फ्रांसिस ने हमेशा संघर्ष, गरीबी और जलवायु आपदाओं से भाग रहे लोगों की मदद करने की अपील की है। उनका मानना है कि सभी सरकारों को अपनी क्षमता के अनुसार इन प्रवासियों की मदद करनी चाहिए। कार्डिनल चेर्नी ने कहा, 'दुनिया के बहुत कम देश ऐसे हैं जो वास्तव में अपनी सीमा से अधिक प्रवासियों को स्वीकार कर चुके हैं। इसलिए हमें मानवता, नागरिकता और ईसाई मूल्यों के आधार पर इन जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।'