पाकिस्तान में पोलियो वायरस का नया मामला खैबर पख्तूनख्वा के तोरघर जिले में मिला है। इस साल देशभर में अब तक 30 केस दर्ज हुए हैं। 2024 में 71 मामले दर्ज हुए थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले टीकाकरण अभियानों से मामलों में कमी आई है, पर कुछ क्षेत्रों में वायरस अब भी सक्रिय है।
पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में गिरावट के बावजूद यह बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक और पोलियो वायरस का मामला सामने आया है, जिससे इस साल देशभर में कुल मामलों की संख्या 30 हो गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) के अनुसार, यह मामला तोरघर जिले के घारी यूनियन काउंसिल के एक साल के बच्चे में पाया गया है।
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एनआईएच की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अब तक सामने आए 30 मामलों में से 19 खैबर पख्तूनख्वा से, नौ सिंध से, जबकि पंजाब और गिलगिट-बाल्टिस्तान से एक-एक मामला है। संस्थान ने बताया कि सितंबर महीने में देश के 87 जिलों से 127 सीवेज सैंपल एकत्र किए गए थे। इनमें से 81 सैंपल निगेटिव जबकि 44 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं।
प्रदेशवार पोलियो सैंपल का हाल
बलूचिस्तान से 21 निगेटिव और दो पॉजिटिव सैंपल मिले हैं। पंजाब से 22 निगेटिव, आठ पॉजिटिव और एक जांच के अधीन सैंपल सामने आया। खैबर पख्तूनख्वा से 24 निगेटिव और 10 पॉजिटिव सैंपल दर्ज हुए। सिंध से सात निगेटिव, 21 पॉजिटिव और एक लंबित सैंपल मिला, जबकि इस्लामाबाद और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भी कुछ सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं।
टीकाकरण अभियान का असर
संस्थान ने कहा कि कुल मिलाकर पोलियो वायरस के मामलों में कमी देखने को मिली है, जो हाल के सफल टीकाकरण अभियानों का परिणाम है। हालांकि, कुछ उच्च जोखिम वाले इलाकों में वायरस का प्रसार अब भी जारी है। बीते साल यानी 2024 में देश में कुल 71 पोलियो केस दर्ज किए गए थे और वायरस 90 जिलों में फैला था।
दुनिया के दो देशों में ही बाकी है पोलियो वायरस
पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के वे दो देश हैं जहां अब भी पोलियो स्थानिक बीमारी के रूप में मौजूद है। सुरक्षा चुनौतियां, वैक्सीन को लेकर झिझक और अफवाहें पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन की सबसे बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। एनआईएच की रिपोर्ट में कहा गया कि सितंबर में अभिभावकों द्वारा टीकाकरण से इंकार करने के मामले कुछ कम हुए हैं। विशेषज्ञों ने दोहराया कि पांच वर्ष से कम उम्र के हर बच्चे को ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) की खुराक देना ही इस बीमारी से बचाव का एकमात्र उपाय है।