नेपाली कांग्रेस के महाधिवेशन ने पार्टी में बढ़ती दरारों को साफ कर दिया है। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का गुट भले फिलहाल मजबूत हालत में हो, लेकिन पार्टी के अंदर उसके लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री देउबा और उनके गुट को ये चुनौती नई पीढ़ी के नेताओं से मिल रही है। इस पीढ़ी के नेताओं का आरोप है कि देउबा ने नेपाली कांग्रेस को एक बिना सिद्धांतों वाली पार्टी बना दिया है।
पिछले हफ्ते नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा ने काठमांडू स्थित नेपाल एकेडमी में एक सभा का आयोजन किया। थापा 46 साल के हैं। माना जाता है कि वे नई पीढ़ी के नेताओं का नेतृत्व कर रहे हैं। बीते हफ्ते हुए आयोजन में उन्होंने अपना राजनीतिक दस्तावेज जारी किया। इसे उन्होंने पार्टी और देश के भविष्य का रोडमैप बताया है। इस दस्तावेज में पार्टी के लिए कुछ फौरी और कुछ दीर्घकालिक कार्यक्रम बताए हैं। दस्तावेज में उन्होंने अगले पांच साल में पार्टी को अपनी पहचान के साथ खड़ा होने की जरूरत पर जोर दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस महाधिवेशन में पार्टी साफ तौर पर दोराहे पर खड़ी नजर आई है। इस बात की जरूरत वरिष्ठ नेता भी महसूस कर रहे हैं कि नेपाली कांग्रेस की विचारधारा में संशोधन और संगठन में पूरे उलटफेर की जरूरत है। इस वजह से गगन थापा के नेतृत्व वाले गुट ने जो दस्तावेज जारी किया है, उसने सबका ध्यान खींचा है। थापा के 60 पेज के दस्तावेज में कहा गया है- ‘नेपाल की राजनीति में नेपाली कांग्रेस सिर्फ एक संगठन नहीं है। यह एक विचार है। यह एक अभियान है। यह देश की सबसे पुरानी पार्टियों में एक है, जिसने देश में अनेक अभियान चलाए हैं। नेपाली कांग्रेस जो दिशा तय करती है, उससे देश का रास्ता तय होता है।’
इस दस्तावेज से बने दबाव का ही नतीजा है कि नेपाली कांग्रेस ने महाधिवेशन के दौरान ‘नीति सम्मेलन’ आयोजित करने का फैसला किया। कहा गया कि इस सम्मेलन में पार्टी की विचारधारा, सिद्धांत और लक्ष्यों पर विचार किया जाएगा। लेकिन पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि इस सम्मलेन की कोई तारीख तय नहीं की गई है। इसे देखते हुए पार्टी के 83 वर्षीय सदस्य इंद्र बहादुर गुरुंग ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘पार्टी बिखरी हुई है। इसे दुरुस्त करने की जरूरत है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि जिसके भी हाथ में पार्टी का नेतृत्व आएगा, वह पार्टी का रूप बदलने में सफल होगा। लेकिन मैं युवा नेताओं की पहल से खुश हूं।’