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UN: पीएम के प्रधान सचिव ने उच्च स्तरीय पैनल में लिया भाग, विकासशील देशों में आपदा जोखिम को कम करने पर की चर्चा

Sat, 20 May 2023 03:01 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

बोत्सवाना सरकार द्वारा उच्च स्तरीय पैनल का आयोजन किया गया था। बैठक के दौरान पैनलिस्ट ने एलएलडीसी के सामने आने वाली कई चुनौतियों को पहचाना।
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PK Mishra - फोटो : ANI
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विस्तार
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आपदा जोखिमों को कम करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा इन दिनों न्यूयॉर्क में है, वह विकासशील देशों में आपदा जोखिमों को कैसे कम किया जाए इसको लेकर कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। इस कड़ी में उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लिया जहां उन्होंने विकासशील देशों में लचीलापन बढ़ाने और आपदा जोखिम को कम करने के बारे में बात की।

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बोत्सवाना सरकार द्वारा उच्च स्तरीय पैनल का आयोजन किया गया था। बैठक के दौरान पैनलिस्ट ने एलएलडीसी के सामने आने वाली कई चुनौतियों को पहचाना। 

संयुक्त राष्ट्र में भारत के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया कि पीएम के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने बोत्सवाना सरकार द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय पैनल में भाग लिया, जिसका विषय 'लचीलापन बढ़ाना और लैंडलॉक्ड विकासशील देशों में आपदा जोखिम को कम करना था। इस दौरान उन्होंने विकासशील देशों में आपदा जोखिम लेककर सामना की जाने वाली चुनौतियों को वहां मौजूद लोगों के सामने रखा।

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पीके मिश्रा ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। गुरुवार को, मिश्रा ने कहा कि भारत आपदा जोखिम में कमी के मुद्दों को बहुत महत्व देता है और केवल एक दशक में हम चक्रवातों से होने वाले नुकसान को दो प्रतिशत से भी कम करने में सक्षम हुए हैं।

उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में, हम आपदा जोखिम में कमी के मुद्दों को अत्यधिक महत्व देते हैं। यह एक केंद्रीय सार्वजनिक नीति का मुद्दा है। हमने आपदा जोखिम में कमी के लिए निर्धारित धन में काफी वृद्धि की है। 
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उन्होंने कहा कि केवल एक दशक से अधिक समय में, हम चक्रवातों से होने वाले जीवन के नुकसान को दो फीसदी से भी कम करने में सक्षम हुए हैं। अब हम सभी खतरों से होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम विकसित कर रहे हैं, इनमें भूस्खलन, हिमनदी झील का फटना बाढ़, भूकंप , जंगल की आग, गर्मी की लहरें और बिजली शामिल हैं। 
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