दो दिन के इस्राइल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नेसेट (इस्राइली संसद) को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध का जिक्र किया और लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब के योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, '1970 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब के वीरतापूर्ण योगदान को व्यापक रूप से जाना जाता है।'
कौन थे लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब?
लेफ्टिनेंट जनरल जैक फर्ज राफेल जैकब वर्ष 1971 में भारतीय सेना की पूर्वी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ थे। उन्हें जेएफआर जैकब के नाम से भी जाना जाता है। जैकब ने तेज हमलों की योजना तैयार की थी, जिसे युद्ध के चरम पर पूर्वी पाकिस्तान पर आक्रमण के लिए अपनाया गया। इस योजना के कारण भारतीय सेना केवल 15 दिनों में ढाका तक पहुंचने में सफल रही।
उनकी योजना के अनुसार पाकिस्तान की कमान और संचार व्यवस्था को निष्क्रिय करना था और बीच के शहरों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए वैकल्पिक मार्गों से ढाका पहुंचना था, जो उस क्षेत्र का राजनीतिक और रणनीतिक केंद्र था। 16 दिसंबर 1971 को ऐतिहासिक आत्मसमर्पण पत्र लेकर जाने वाले जेएफआर जैकब ही थे। उन्होंने पाकिस्तान सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी को आधे घंटे के भीतर शर्तें स्वीकार करने के लिए तैयार कर लिया था। जनरल जैकब ने ढाका में तैनात नियाजी और उनके 26 हजार सैनिकों से रेसकोर्स मैदान में सार्वजनिक रूप से ऐतिहासिक आत्मसमर्पण करवाया।
1923 में कोलकाता में जन्मे जैकब ने अपनी शिक्षा दार्जिलिंग और अमेरिका में प्राप्त की। उन्होंने भारतीय सेना में शामिल होकर द्वितीय विश्व युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और गोवा तथा पंजाब के राज्यपाल के रूप में भी सेवा दी। 13 जनवरी 2016 को 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
भारत भी आतंकवाद का शिकार: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने सात अक्तूबर के हमास के हमलों की भी आलोचना की। उन्होंने इसे क्रूर हमला करार देते हुए भारत की ओर से संवेदना व्यक्त की। उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत भी आतंकवाद का शिकार है। नागरिकों की हत्या को किसी भी तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। हमें 26/11 के मुंबई हमले याद हैं, जिनमें इस्राइलियों समेत भारत के कई नागरिकों की जानें गईं। आपकी ही तरह हमारी भी आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति है। आतंकवाद विश्वास को तोड़ता है। आतंकवाद के खिलाफ दोहरा रवैया नहीं रख सकते हैं। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति जरूरी है।
'आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई की जरूरत'
उन्होंने कहा, आतंकवाद का मकसद समाज को अस्थिर करना, विकास को रोकना और भरोसे को खत्म करना है। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए निरंतर और समन्वित वैश्विक कार्रवाई की जरूरत है, क्योंकि आतंकवाद हर जगह शांति के लिए खतरा है। इसीलिए, भारत स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है।
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यूएनएससी समर्थित गाजा शांति पहल का समर्थन किया
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) समर्थित गाजा शांति पहल एक मार्ग पेश करती है। भारत ने इस पहल के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया है। हमारा मानना है कि इसमें फलस्तीन मुद्दे के समाधान समेत इस क्षेत्र के सभी लोगों के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का वादा निहित है। आइए, हमारे सभी प्रयास बुद्धिमत्ता, साहस और मानवता से प्रेरित हों। शांति का मार्ग हमेशा आसान नहीं होता। लेकिन भारत इस क्षेत्र में संवाद, शांति और स्थिरता के लिए आपके और दुनिया के साथ खड़ा है।