प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए भारत-इस्राइल संबंधो, आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति और शांति की दिशा में भारत की प्रतिबद्धताओं पर बात की। इसके साथ ही उन्होंने गाजा में शांति स्थापना को लेकर भी अहम बातें कही। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने अपने संबोधन में क्या-क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस्राइली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए भारत-इस्राइल संबंध, आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति समेत कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। इस दौरान खास पल तब सामने आया जब पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इस बात का जिक्र किया कि उनके जन्मदिन के दिन ही भारत ने इस्राइल को एक देश के तौर पर मान्यता दी थी। इसके इतर पीएम मोदी ने शांति की दिशा में भारत की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने और क्या-क्या कहा?
पीएम मोदी ने 26/11 हमले का जिक्र कर क्या कहा?
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद के दर्द को सहा है। हम 26/11 मुंबई हमलों को याद करते हैं, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई, जिनमें इस्राइली नागरिक भी शामिल थे। भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति भी हमेशा सख्त रही है और इसमें कोई दोहरापन नहीं है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आतंकवाद समाज को अस्थिर करने, विकास को रोकने और भरोसा तोड़ने के लिए होता है। इसे रोकने के लिए लगातार और संगठित वैश्विक प्रयास जरूरी हैं क्योंकि कहीं भी आतंकवाद, दुनिया में शांति के लिए खतरा है। इसीलिए भारत सभी ऐसे प्रयासों का समर्थन करता है जो स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा दें।
भारत-इस्राइल का संबंध इचिहास और बलिदान से जुड़ा- पीएम मोदी
इस दौरान पीएम मोदी ने भारत और इस्राइल के एतिहासिक रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का इस भूमि के साथ संबंध केवल दोस्ती और सहयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बलिदान और इतिहास भी जुड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पहले विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में 4,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। भारत की ये गाथा इस भूमि के साथ हमारे पुराने और गहरे संबंधों को दर्शाती है। इस दौरान पीएम मोदी ने मेजर ठाकुर दलपत सिंह को भी याद किया।
आतंकवाद के खिलाफ संगठित प्रयासों की जरूरत पर दिया जोर
इस दौरान प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खतरों के खिलाफ वैश्विक और संगठित प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि आतंकवाद समाज को अस्थिर करता है, विकास को रोकता है और भरोसे को कमजोर करता है। इसलिए, दुनिया भर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी प्रयासों का समर्थन करना जरूरी है।
पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल का भी समर्थन किया और कहा कि यह पहल क्षेत्र के सभी लोगों के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का रास्ता देती है, जिसमें फलस्तीन का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि शांति के लिए किए जाने वाले सभी प्रयास बुद्धिमानी, साहस और मानवता से प्रेरित होने चाहिए। रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन भारत संवाद, शांति और स्थिरता के लिए आपके और पूरी दुनिया के साथ है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि भारत में इस्राइल के साहस, संकल्प और उपलब्धियों के लिए बहुत सम्मान और प्रशंसा है।