इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इस्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से भी मुलाकात की। इस दौरान शिक्षा, स्टार्ट-अप, नवाचार, तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर बात हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
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पीएम मोदी का इस्राइल दौरा
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को दो दिन की यात्रा पर इस्राइल पहुंचे। नौ साल में यह उनकी दूसरी इस्राइल यात्रा है। जुलाई 2017 में अपनी पहली यात्रा के दौरान भारत और इस्राइल के रिश्तों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया था। भारत और इस्राइल के बीच रक्षा, विज्ञान और तकनीक, नवाचार, साइबर सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में और तेजी आई है, खासकर रक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में।
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग अहम स्तंभ
समय के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग इस साझेदारी का अहम स्तंभ बन चुका है। इस्राइल भारत को कई तरह के सैन्य उपकरण और हथियार प्रणाली उपलब्ध कराता है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी लगातार प्रगति हो रही है। इससे पहले नवंबर में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की इस्राइल यात्रा के दौरान भारत और इस्राइल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत शुरू करने के लिए शर्तों के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए।
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भारत इस्राइल के बीच हुआ था एक समझौता
गौरतलब है कि नवंबर 2023 में भारत और इस्राइल ने एक समझौता किया था, जिसके तहत भारतीय कामगारों को अस्थायी और कानूनी रूप से इस्राइल में काम करने की सुविधा दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, इसके बाद से अब तक करीब 20,000 भारतीय अलग-अलग माध्यमों से इज़राइल पहुंच चुके हैं। इससे भी पहले सितंबर में दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय निवेश समझौते (बीआईए) पर भी हस्ताक्षर किए थे। इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी मजबूत संबंध हैं। इस्राइल में 41 हजार से ज्यादा भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।