पहले जानें- क्या भारत में वर्क फ्रॉम होम को लेकर कोई कानून है?
मौजूदा समय में भारत के श्रम कानूनों में कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस तरह की कार्य व्यवस्था मुख्य रूप से नौकरी के अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट पर, कंपनी की एचआर नीति, और कर्मचारी और नियुक्ति देने वाले के बीच आपसी समझौते से तय की जाती है।
- भारतीय अनुबंध नियमों के मुताबिक, कंपनियों या नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर्स) को कर्मचारियों की उपस्थिति के नियम और काम करने के स्थान को तय करने का पूरा अधिकार है।
- भारत में व्हाइट-कॉलर (ऑफिस या डेस्क में बैठकर करने वाली) नौकरियों को नियंत्रित करने वाले राज्य-स्तरीय शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट, एक्ट में भी वर्क फ्रॉम होम का कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
- अलग से कोई कानूनी ढांचा न होने के कारण नियुक्ति देने वाला/वाले कानूनी तौर पर कर्मचारियों को कभी भी और कैसे भी ऑफिस आकर काम करने के लिए कह सकते हैं।
आखिर कोरोनाकाल में कैसे अनिवार्य हो गया था वर्क फ्रॉम होम?
कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए महामारी के दौरान विश्व स्तर पर पहली बार वर्क फ्रॉम होम को वैश्विक स्तर पर अपनाया गया था। भारत में भी कोरोनाकाल में बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर इसे अनिवार्य और कानूनी रूप से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, महामारी रोग अधिनियम, 1897 और राज्य के आपदा-प्रबंधन नियमों के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया था।
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बाध्यकारी दिशा-निर्देश भी जारी किए थे, जिनमें कार्यालयों को जहां तक संभव हो रिमोट तरीके (वर्क फ्रॉम होम) से काम करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। इन्हीं विशेष आपात कानूनों और सरकारी आदेशों की वजह से कोरोनाकाल में वर्क फ्रॉम होम एक कानूनी बाध्यता बन गया था।
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भारत में भी वर्क फ्रॉम होम लागू करने की अपील।
- फोटो : अमर उजाला
वियतनाम: यहां छोटे उद्योगों और ट्रांसपोर्टर्स पर पड़ रहे ईंधन की कीमतों के असर को कम करने के लिए व्यवसायों को रिमोट वर्क और ऑनलाइन बैठकों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इंडोनेशिया: ईंधन की मांग को नियंत्रित करने और भंडार को प्रबंधित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कार्यालय आने के दिनों को कम करके रिमोट वर्क की व्यवस्था लागू की गई है।
म्यांमार: ईंधन की कमी और पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारों के कारण प्रशासन के कुछ हिस्सों में रिमोट वर्क को लागू किया गया है। साथ ही निजी वाहनों के लिए आल्टरनेट डे पर चलाने के नियम पेश हुए हैं।
इसके अलावा थाईलैंड, सिंगापुर और बांग्लादेश जैसे देशों ने पूरी तरह से वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य तो नहीं किया है, लेकिन ऊर्जा बचाने के लिए कर्मचारियों के काम के समय में बदलाव, कार्यालयों में एसी के उपयोग को सीमित करने और गैर-जरूरी यात्राओं पर रोक जैसे अन्य कदम उठाए हैं। कंबोडिया, लाओ पीडीआर, मलयेशिया, पेरू, मिस्र भी ऐसे उपाय अपना रहे हैं।
यूरोप: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईएई) के इमरजेंसी एनर्जी कंजर्वेशन (आपातकालीन ऊर्जा संरक्षण) ट्रैकर के अनुसार, यूरोपीय आयोग समेत इन देशों ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए निजी और सरकारी वाहनों का उपयोग सीमित करने, एक दिन छोड़कर गाड़ी चलाना, सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया।
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