ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बुधवार को संसद में भारत के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की सराहना की है और उसे शानदार बताया। स्टार्मर ने विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इस समझौते समाप्त करना चाहती है।
प्रधानमंत्री स्टार्मर हाउस ऑफ कॉमन्स में साप्ताहिक प्रश्नकाल के दौरान जवाब दे रहे थे। स्टार्मर ने जिक्र करते हुए कहा कि पिछले हफ्ते भारत के साथ एफटीए वार्ता पूरी करने में लेबर पार्टी की कामयाबी मिली, जबकि कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार के दौरान पिछले आठ वर्षों में इस समझौते को पूरा नहीं किया जा सकता था।
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स्टार्मर ने लेबर सरकार में रोजगार और व्यापार के क्षेत्र में लिए गए फैसलों पर विपक्ष की नेता केमी बेडेनोच से बहस की। उन्होंने कहा, पिछले हफ्ते हमने भारत के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता किया और अमेरिका के साथ एख प्रमुख समझौता किया, जिससे ब्रिटेन में रोजगार की रक्षा हुई, टैरिफ घटाए गए और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने आगे कहा, भारत के साथ शानदार समझौता (एफटीए) किया गया है, जिसमें कारों पर टैरिफ 10 फीसदी तक घटाए गए हैं, व्हिस्की और जिन पर टैरिफ आधे हो गए हैं और हमारी अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड का योगदान हो रहा है। अब वह (बेडेनोच) क्या कहती हैं, वह इसे खत्म देना चाहती हैं।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने बेडेनोच के पिछले हफ्ते दिए बयानों का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय दावों को 'अफवाह' करार दिया था। इन दावों में बताया गया था कि दोगुना योगदान संधि (डीसीसी) पिछली सरकार के साथ वार्ता के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना था। यह संधि दोनों देशों में काम या कारोबार करने वालों लोगों को राहत देगी। इससे सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें एक ही कमाई पर दो बार कर (टैक्स) न देना पड़े।
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स्टार्मर ने कहा, वह पिछले हफ्ते भारत सरकार के दावो अफवाह तक कह गईं थीं। कोई हैरानी की बात नहीं। वह व्यापार सचिव के रूप में बुरी तरह विफल रही थीं। कंजर्वेटिव पार्टी का काम खत्म हो चुका है। वह अंधकार में जा रहे हैं। वह एक मृत पार्टी है।
कंजर्वेटिव पार्टी ने डीसीसी को लेकर सरकार पर हमला किया था। पार्टी ने कहा था कि इससे भारतीय श्रमिकों को पहले तीन वर्षों के लिए टैक्स बचाने का मौका मिलेगा। हालांकि, ब्रिटिश सरकार और भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह छूट पारस्परिक है, जो ब्रिटिश श्रमिकों को भी भारत में लाभ पहुंचाती है और यह भारत सरकार के साथ पूर्व कंजर्वेटिव सरकार की चर्चा का भी हिस्सा था, जब बेडेनोच व्यापार सचिव थीं।