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फिलीपींस: राष्ट्रपति चुनाव में बदल रहा है रुझान, अमेरिका और चीन का है बड़ा दांव

Fri, 08 Apr 2022 01:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला

सार

फिलीपींस के चुनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी पैदा हुई है। इसकी वजह मुकाबले की सूरत है। एक तरफ रोब्रेडो हैं, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता रह चुकी हैं। उनके मुकाबले मार्कोस हैं, जिन्हें उनके पिता की विरासत से जोड़ कर देखा जाता है। मार्कोस के पिता पर मानवाधिकार के घर उल्लंघन का आरोप था...
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मार्कोस जूनियर और उपराष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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फिलीपींस में राष्ट्रपति चुनाव से एक महीना पहले उम्मीदवारों की लोकप्रियता में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। चुनाव अभियान शुरू होने के समय से फर्डिनांड मार्कोस जूनियर बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं। लेकिन अब उप राष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो की लोकप्रियता में तेजी से उछाल आया है। मार्कोस पूर्व तानाशाह फर्डिनांड मार्कोस के बेटे हैं, जिन्होंने देश पर 1965 से 1986 तक बेरहमी से राज किया था।

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फिलीपींस में नया राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान नौ मई को होगा। पल्स एशिया नाम की सर्वे एजेंसी ने इसी हफ्ते अपना ताजा चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षण जारी किया। इसमें रोब्रेडो की लोकप्रियता में नौ फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई गई। इसके मुताबिक अब रोब्रेडो को 24 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है। हालांकि मार्कोस जूनियर अब भी उनसे बहुत आगे हैं, लेकिन जिस तेजी से ट्रेंड बदला है, राजनीतिक पर्यवेक्षक उसे महत्त्वपूर्ण मान रहे हैं। उनके मुताबिक चूंकि मतदान में अभी एक महीना बाकी है, इसलिए उलटफेर की संभावना बनी हुई है।

उप राष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो को मिल रहा समर्थन

रोब्रेडो को हाल में स्थानीय सरकारों से जुड़े कई बड़े अधिकारियों का समर्थन भी मिला है। इसके अलावा उनके समर्थकों ने घर-घर जाकर समर्थन जुटाने का अभियान छेड़ दिया है। रोब्रेडो के प्रवक्ता बैरी गुटिरेज ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- हम जो रुझान जमीन पर देख रहे हैं, अब वह जनमत सर्वेक्षणों में भी झलकने लगा है। उन्होंने कहा- ‘रफ्तार लेनी रोब्रेडो के साथ है। हमें उम्मीद है कि ये रुझान मजबूत होगा और नौ मई तक लगातार तेज होता जाएगा। अभी जो संकेत मिल रहे हैं, वे बताते हैं कि चुनाव की दिशा बदल रही है।’

फिलीपींस के चुनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी पैदा हुई है। इसकी वजह मुकाबले की सूरत है। एक तरफ रोब्रेडो हैं, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता रह चुकी हैं। उनके मुकाबले मार्कोस हैं, जिन्हें उनके पिता की विरासत से जोड़ कर देखा जाता है। मार्कोस के पिता पर मानवाधिकार के घर उल्लंघन का आरोप था। मार्कोस जूनियर को मौजूदा राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते का समर्थन भी हासिल है। दुतेर्ते पर भी मानव अधिकारों के हनन के आरोप हैं।

रोब्रेडो हैं अमेरिकी समर्थक!

रोब्रेडो ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में छोटे कारोबारियों को 100 अरब पेसो (दो अरब डॉलर) का सहायता पैकेज देने का वादा किया है। कोरोना महामारी के दौरान इन कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है। रोब्रेडो और मार्कोस के बीच विदेश नीति को लेकर गहरे मतभेद हैं। रोब्रेडो की सोच को अमेरिका समर्थक समझा जाता है, जबकि मार्कोस का झुकाव चीन की तरफ है। रोब्रेडो ने कहा है कि वे ‘समान सोच वाले राष्ट्रों’ से संबंध गहरा करने को प्राथमिकता देंगी।

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दूसरी ओर मार्कोस ने बेलाग कहा है कि वे चीन के साथ संबंध मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे, हालांकि वे पश्चिमी देशों से बिगाड़ नहीं करेंगे। पर्यवेक्षकों की राय है कि दोनों उम्मीदवारों की विदेश नीति संबंधी प्राथमिकता की वजह से फिलीपींस के चुनाव में अंतरराष्ट्रीय रुचि और बढ़ी है। अमेरिका और उसके साथी देश रोब्रेडो की जीत से खुश होंगे, जबकि मार्कोस की जीत चीन के लिए अच्छी खबर होगी। फिलहाल, मार्कोस को 50 फीसदी से कुछ अधिक मतदाताओं का समर्थन मिलता दिख रहा है।

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