फिलीपींस में राष्ट्रपति चुनाव से एक महीना पहले उम्मीदवारों की लोकप्रियता में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। चुनाव अभियान शुरू होने के समय से फर्डिनांड मार्कोस जूनियर बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं। लेकिन अब उप राष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो की लोकप्रियता में तेजी से उछाल आया है। मार्कोस पूर्व तानाशाह फर्डिनांड मार्कोस के बेटे हैं, जिन्होंने देश पर 1965 से 1986 तक बेरहमी से राज किया था।
रोब्रेडो को हाल में स्थानीय सरकारों से जुड़े कई बड़े अधिकारियों का समर्थन भी मिला है। इसके अलावा उनके समर्थकों ने घर-घर जाकर समर्थन जुटाने का अभियान छेड़ दिया है। रोब्रेडो के प्रवक्ता बैरी गुटिरेज ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- हम जो रुझान जमीन पर देख रहे हैं, अब वह जनमत सर्वेक्षणों में भी झलकने लगा है। उन्होंने कहा- ‘रफ्तार लेनी रोब्रेडो के साथ है। हमें उम्मीद है कि ये रुझान मजबूत होगा और नौ मई तक लगातार तेज होता जाएगा। अभी जो संकेत मिल रहे हैं, वे बताते हैं कि चुनाव की दिशा बदल रही है।’
फिलीपींस के चुनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी पैदा हुई है। इसकी वजह मुकाबले की सूरत है। एक तरफ रोब्रेडो हैं, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता रह चुकी हैं। उनके मुकाबले मार्कोस हैं, जिन्हें उनके पिता की विरासत से जोड़ कर देखा जाता है। मार्कोस के पिता पर मानवाधिकार के घर उल्लंघन का आरोप था। मार्कोस जूनियर को मौजूदा राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते का समर्थन भी हासिल है। दुतेर्ते पर भी मानव अधिकारों के हनन के आरोप हैं।
रोब्रेडो ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में छोटे कारोबारियों को 100 अरब पेसो (दो अरब डॉलर) का सहायता पैकेज देने का वादा किया है। कोरोना महामारी के दौरान इन कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है। रोब्रेडो और मार्कोस के बीच विदेश नीति को लेकर गहरे मतभेद हैं। रोब्रेडो की सोच को अमेरिका समर्थक समझा जाता है, जबकि मार्कोस का झुकाव चीन की तरफ है। रोब्रेडो ने कहा है कि वे ‘समान सोच वाले राष्ट्रों’ से संबंध गहरा करने को प्राथमिकता देंगी।