नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल
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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-एकीकृत समाजवादी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल के खिलाफ बृहस्पतिवार को भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने पतंजलि भूमि सौदे में संलिप्तता के लिए विशेष अदालत में मुकदमा दर्ज किया। अख्तियार दुरुपयोग आयोग (सीआईएए) ने नेपाल सहित 93 लोगों पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया। इसे नेपाल के इतिहास में किसी पूर्व पीएम के विरुद्ध पहला ऐसा केस बताया जा रहा है।
वहीं, पतंजलि ने धांधली के आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसने नेपाल के कानूनों के अनुसार उचित प्रक्रिया के माध्यम से जमीन खरीदी है। सीआईएए ने आरोप लगाया कि 2010 में माधव नेपाल की सरकार के दौरान मंत्रिपरिषद ने पतंजलि योगपीठ को काभ्रेपालनचोक जिले में 815 रोपनी जमीन (1 रोपनी = 0.0509 हेक्टेयर) खरीदने के लिए भूमि सीमा छूट दी थी। खरीदी गई जमीन बाद में मंत्रिपरिषद की मंजूरी से काष्ठमंडप बिजनेस होम्स प्रा. लि. को बेची गई। इसे नेपाल में कानून तोड़ना बताया गया था।
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जांच के मुताबिक, पतंजलि ने 593 रोपनी जमीन खरीदी, जिसमें से 353 रोपनी 15 आना जमीन बेच दी थी। आरोपियों में पूर्व कानून मंत्री प्रेम बहादुर सिंह, पूर्व भूमि सुधार मंत्री डंबर श्रेष्ठ, पूर्व मुख्य सचिव माधव प्रसाद घिमिरे और पतंजलि के नेपाल प्रमुख शालिग्राम सिंह समेत 93 लोग शामिल हैं।
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तत्कालीन भूमि सुधार मंत्री डंबर श्रेष्ठ ने आगे बढ़ाया था प्रस्ताव
पूरे मामले की जांच में पता चला है कि तत्कालीन भूमि सुधार मंत्री डम्बर श्रेष्ठ को यह प्रस्ताव आगे बढ़ाने का निर्देश पूर्व पीएम माधवकुमार नेपाल ने दिया था। आयोग ने 18.58 करोड़ नेपाली रुपये के सरकारी नुकसान का अनुमान लगाया है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2002 के तहत सजा व जुर्माने की मांग की है। माधव नेपाल ने रौतहट में मीडिया से बात करते हुए आरोपों का खंडन किया है।