अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से झटका लगा है। एक संघीय न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को राष्ट्रपति ट्रंप के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विदेशी छात्रों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था। हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी। हार्वर्ड ने इसे अवैध प्रतिशोष बताते हुए कहा था कि यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने व्हाइट हाउस की कुछ मांगों को अस्वीकार कर दिया था।
नई याचिका बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को कोर्ट में दायर की गई, जिसमें हार्वर्ड ने कहा कि राष्ट्रपति की कार्रवाई पिछले कोर्ट के फैसले की अवहेलना करती है। पिछले महीने एक संघीय जज ने होमलैंड सुरक्षा विभाग को यह आदेश दिया था कि वह हार्वर्ड को विदेशी छात्रों की मेजबानी करने से न रोके।
विश्वविद्यालय को सजा देने के लिए की गई कार्रवाई: हार्वर्ड
ट्रंप प्रशासन ने जिस कानून का सहारा लिया है, वह उन्हें राष्ट्र के हितों के लिए नुकसानदायक माने जाने वाले विदेशियों के एक समूह को अमेरिका में घुसने से रोकने की अनुमति देता है। हालांकि, हार्वर्ड ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि केवल उन लोगों को निशाना बनाना जो हार्वर्ड में पढ़ने के लिए अमेरिका आ रहे हैं, इस विदेशी समूह की श्रेणी में रखना सही नहीं है। हार्वर्ड ने लिखा, 'राष्ट्रपति की कार्रवाई अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि विश्वविद्याल के खिलाफ सरकारी प्रतिशोध को आगे बढ़ाने के लिए की गई है।
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पुराने मुकदमे का हिस्सा है संशोधित शिकायत
संशोधित शिकायत उस पुराने मुकदमे का हिस्सा है, जिसमें पिछले महीने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की पिछली कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। बोस्टन में एक संघीय न्यायाधीश ने हार्वर्ड की याचिका पर स्कूल के प्रथम संशोधन अधिकारों का उल्लंघन बता सरकार को विदेशी छात्रों को हटाने से रोक दिया था। अब हार्वर्ड ने अपनी नई फाइलिंग में उसी न्यायाधीश से ट्रंप के नए फैसले को भी रोकने की मांग की। हार्वर्ड की याचिका के कुछ घंटों बाद ही संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप के इस फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी।
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ट्रंप का फैसला लागू होने से प्रभावित हो सकते थे हजारों विदेशी छात्र
यदि राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला लागू हो जाता तो यह हजारों विदेशी छात्रों को प्रभावित करेगा। ट्रंप के इस फैसले के चलते गर्मियों और शरद ऋतु में कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स परिसर में आने वाले हजारों विदेशी छात्रा अमेरिका में प्रवेश करने से वंचित रह सकते थे। हार्वर्ड ने लिखा, 'हार्वर्ड के 7,000 से अधिक F-1 और J-1 वीजा धारक और उनके आश्रित सरकार की बदले की भावना का शिकार बन गए हैं।'
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