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Pakistan: पाकिस्तान की उम्मीद डूबी, और मुश्किल हुआ डिफॉल्टर होने से बचना

Sun, 18 Dec 2022 03:48 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए छह बिलियन डॉलर का नया कर्ज मंजूर किया है। लेकिन उनसे कई शर्तें लगाई हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद ही कर्ज की किस्तें जारी होंगी। पहली किस्त के तहत नौवीं समीक्षा के बाद 1.8 बिलियन डॉलर की रकम जारी करने पर सहमति हुई थी।
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Pakistan Economy - फोटो : File Photo
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विस्तार
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पाकिस्तान के आर्थिक संकट से उबरने की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान सरकार ने यह स्वीकार किया है कि ‘कई मुद्दों’ पर उसका अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ मतभेद खड़ा हो गया है। इससे पाकिस्तान के आर्थिक प्रदर्शन की नौवीं समीक्षा में देर हो रही है। इस समीक्षा में खरा उतरने से पहले पाकिस्तान को आईएमएफ से कर्ज मिलना संभव नहीं है। जबकि जल्द कर्ज नहीं मिला, तो पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने (कर्ज चुकाने में अक्षम होने) के और करीब पहुंच जाएगा। 

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हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इसे सार्वजनिक रूप से नहीं कहा है, लेकिन समझा जाता है कि मतभेद के जिन ‘कई मुद्दों’ का जिक्र उसने किया है, उनमें एक रूस से रियायती दर पर कच्चा तेल खरीदने की पाकिस्तान की कोशिश भी है। आईएमएफ में अमेरिका की इच्छा सर्वोपरि मानी जाती है। पाकिस्तान के रूस का ग्राहक बनने से दुनिया में रूस को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिश को झटका लगेगा। विश्लेषकों के मुताबिक इसीलिए रूस से तेल सौदा करने का फैसला पाकिस्तान के अंदर भी विवादों से घिर गया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने गुरुवार को अमेरिका में कहा था कि उनका देश रूस से रियायती दर पर कच्चा तेल खरीदने की कोशिश नहीं कर रहा है। एक दिन बाद पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक ने उनके इस बयान का सार्वजनिक रूप से खंडन कर दिया। मलिक ने शुक्रवार को यहां कहा कि रूस ‘रियायती दर पर’ पाकिस्तान को तेल देगा। मलिक ने मास्को यात्रा से लौटने के बाद पिछले हफ्ते रूस के साथ बनी सहमति का सार्वजनिक एलान किया था। इसीलिए भुट्टो जरदारी के वॉशिंगटन में दिए बयान पर यहां हैरत जताई गई। अब मलिक ने विदेश मंत्री के बयान का खंडन कर दिया है।
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दो मंत्रियों के बीच इस परस्पर विरोधी बयानबाजी से शहबाज शरीफ सरकार के लिए असहज स्थिति बनी है। समझा जाता है कि इससे पाकिस्तान के लिए आईएमएफ को कर्ज की किस्तें जारी करने पर राजी करना और कठिन हो गया है। शुक्रवार को पाकिस्तान की वित्त राज्य मंत्री आयशा ग़ौस पाशा ने नेशनल असेंबली की एक स्थायी समिति के सामने ‘कई मुद्दों’ पर आईएमएफ के साथ मतभेद उभरने की बात कही। हालांकि उन्होंने दावा किया कि आईएमएफ ने ऋण प्रोग्राम  को स्थगति नहीं किया है। 

आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए छह बिलियन डॉलर का नया कर्ज मंजूर किया है। लेकिन उनसे कई शर्तें लगाई हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद ही कर्ज की किस्तें जारी होंगी। पहली किस्त के तहत नौवीं समीक्षा के बाद 1.8 बिलियन डॉलर की रकम जारी करने पर सहमति हुई थी। लेकिन ये समीक्षा बैठक लगातार टल रही है। 

स्थायी समिति की बैठक में पाशा ने कहा कि मैं आज आईएमएफ के बारे में खुल कर बात करना चाहती हूं। कई मुद्दो पर आईएमएफ के साथ हमारे मतभेद हैँ। ऊर्जा क्षेत्र को दी जा रही कई सब्सिडियों पर आईएमएफ को एतराज है। हाल में पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोलियम की कीमत में दस रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा देश के अंदर बने दबाव के कारण किया गया, लेकिन इससे आईएमएफ के साथ मतभेद और गहराने की स्थिति बन गई है। 

जानकारों का कहना है कि रूस से सस्ता तेल मिलने पर पाकिस्तान ऊर्जा सब्सिडी घटाने की बेहतर स्थिति में होगा। लेकिन इसमें मुश्किल यह है कि अमेरिका नहीं चाहता कि पाकिस्तान उस देश का ग्राहक बने, जिस पर उसने प्रतिबंध लगा रखे हैं।

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