जिस समय चीन के हमले की आशंका बढ़ती जा रही है, ताइवान एक अलग किस्म की चुनौती का सामना कर रहा है। देश की आबादी लगातार घट रही है। आबादी में युवा वर्ग की संख्या में काफी गिरावट आ गई है। इस वजह से ताइवान की सेना में पर्याप्त संख्या में नए सैनिकों की भर्ती नहीं हो पा रही है।
ताइवान की सेना ने भर्ती के लिए जो संख्या तय की थी, उस लक्ष्य से वह काफी पीछे चल रही है। दो करोड़ 35 लाख आबादी वाले इस देश के गृह मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि निम्न जन्म दर अब देश के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। ताइवान की आबादी में पहली बार गिरावट 2020 में आई थी।
अब गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि 2022 में सेना में नई भर्तियों संख्या न्यूनतम स्तर पर रहेगी। मंत्रालय ने कहा है- ‘युवा आबादी में लगातार आ रही गिरावट भविष्य में एक बड़ी चुनौती बन जाएगी।’ विश्लेषकों के मुताबिक इस चुनौती ने बेहद खराब समय पर गंभीर रूप लिया है। इस वक्त चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ताइवान का विलय अपनी मुख्य भूमि के साथ कराने का इरादा नियमित रूप से जता रही है। ताइवान पहले चीन का हिस्सा था, लेकिन 1949 में कम्युनिस्ट क्रांति के समय कम्युनिस्ट विरोधी ताकतें भाग कर वहां चली गईं। तब से ताइवान एक स्वायत्त देश के रूप में मौजूद रहा है।
ताइवान की नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल ने भविष्यवाणी की है कि 2035 तक 2021 की तुलना में देश में हर साल औसतन 20 हजार कम बच्चे पैदा होंगे। पिछले साल ताइवान में 1,53,820 पैदा हुए थे। काउंसिल ने कहा है कि 2023 तक ताइवान सबसे कम जन्म दर वाला क्षेत्र बन जाएगा। यानी इस मामले में वह दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ देगा।
फिलहाल, ताइवान की सेना में एक लाख 62 हजार सैनिक हैं। यह तय लक्ष्य से सात हजार कम है। इन पेशेवर सैन्यकर्मियों के अलावा ताइवान में नियम है कि हर योग्य पुरुषों को कम से कम चार महीने सेना में सेवा देनी होती है। नए हालात को देखते हुए अब ताइवान में इस सवाल पर बहस खड़ी हो गई है कि क्या सरकार को अनिवार्य सैनिक सेवा की अवधि में बढ़ोतरी कर देनी चाहिए।
ताइवान के रक्षा मंत्री चिउ कुओ-चेंग ने इसी हफ्ते कहा कि अनिवार्य सैन्य सेवा के बारे में नई योजना इस साल के अंत तक घोषित की जाएगी। जानकारों के मुताबिक नई योजनाके तहत अगर फिर से अनिवार्य सेवा की अवधि बढ़ाई गई, तो इसे ताइवान में एक बड़े यू-टर्न के रूप में देखा जाएगा। पहले ताइवान में 12 महीनों की अनिवार्य सैन्य सेवा थी। 2018 में उसे घटा कर चार महीने किया गया था।
ताइवान का जनमत अनिवार्य सेवा की अवधि बढ़ाने के पक्ष में है। इस वर्ष मार्च में हुए एक सर्वे से सामने आया कि 75.9 प्रतिशत लोग अनिवार्य सेवा की अवधि बढ़ाने के प्रस्ताव से सहमत हैं। सिर्फ 17.8 प्रतिशत लोगों ने इस पर कड़ा विरोध जताया था।