पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को जबरन धर्मांतरण को गैर-इस्लामिक करार दिया और दावा किया कि इस्लामिक इतिहास में जबरन धर्म परिवर्तन कराने का कोई उदाहरण नहीं है।
ऐवान-ए-सदर (राष्ट्रपति भवन) में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान इमरान ने देश में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की रक्षा और जीर्णोद्धार की शपथ भी ली। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान ने बताया कि मोहम्मद पैगंबर ने अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता दी थी और उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा भी की थी।
उन्होंने सवाल भरे लहजे में कहा, आखिर हम कैसे किसी को जबरन इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर सकते हैं या महिलाओं (गैर-मुस्लिम) के साथ बंदूक की नोक पर शादी कर सकते हैं। आखिर कैसे हम दूसरे को सिर्फ इसलिए मार देते हैं कि वे दूसरे धर्म के हैं। बता दें कि पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन कर शादी के मामले सामने आते रहे हैं।